रांची : झारखंड की राजनीति में इन दिनों पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग का मुद्दा गरमाया हुआ है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला कुछ ऐसा है जिसे मरांडी ने “व्यवस्था का मज़ाक” करार दिया है।
दरअसल, झारखंड पुलिस के चार इंस्पेक्टरों को डीएसपी के पद पर प्रमोट तो सात महीने पहले ही कर दिया गया था, लेकिन उन्हें विभाग में कोई जिम्मेदारी यानी पोस्टिंग नहीं दी गई थी। हैरानी की बात यह है कि जब इन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में महज 24 घंटे बचे थे, तब सरकार को उनकी याद आई। शुक्रवार को इन चारों अधिकारियों अखिलेश प्रसाद मंडल, सरोज कुमार सिंह, शैलेश प्रसाद और विनोद उरांव को स्पेशल ब्रांच में डीएसपी के पद पर तैनात किया गया और शनिवार को वे रिटायर भी हो गए।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटनाक्रम को साझा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर डीएसपी बनने और पोस्टिंग पाने का पैमाना क्या है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहाँ एक तरफ प्रमोटेड अधिकारी सालों तक खाली बैठे रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से चयनित 7वीं से 10वीं बैच के 39 डीएसपी आज भी अपनी पहली पोस्टिंग का इंतज़ार कर रहे हैं।
मरांडी ने कुछ पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर भी प्रहार किया। उन्होंने रूपा तिर्की जैसे मामलों का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी कर्तव्य निभाने के बजाय चरित्र हनन और राजनीतिक रसूख के खेल में लगे रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की मनमानी से पुलिस की विश्वसनीयता और मनोबल दोनों गिर रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस सुधारों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर पहले ही कई सवाल उठ रहे हैं। रिटायरमेंट के ठीक एक दिन पहले दी गई इस ‘उपहार स्वरूप पोस्टिंग’ ने विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मौका दे दिया है।



