Ranchi News : नामकुम में रविवार को आयोजित लैंड राइट फॉर आदिवासी वीमेन समूह की बैठक में आदिवासी महिलाओं के जमीन के अधिकार, इतिहास, नैतिकता और उनके खिलाफ बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता एलिना होरो ने कहा कि आदिवासी समाज की नींव में महिलाओं का श्रम और त्याग है, लेकिन जमीन के मामलों में उनका नाम तक नहीं जुड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाएं समाज बसाने और उसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं, तो उन्हें जमीन का मालिकाना हक क्यों नहीं मिलता?
रंजनी मुर्मू ने कहा कि खेती-किसानी और घर बसाने में महिलाओं की मेहनत सबसे ज्यादा है, फिर भी समाज ने उन्हें ताकत और फैसले लेने की प्रक्रिया से दूर रखा। उन्होंने बताया कि कस्टमरी कानून में महिलाओं के हक का जिक्र तो है, लेकिन खतियान में उनके नाम का अभाव इस बात का सबूत है कि यह कानून धरातल पर लागू नहीं हो रहा।
बैठक में यह भी कहा गया कि अगर महिलाओं को समान मालिकाना हक मिले, तो आदिवासी समाज में लैंगिक समानता मजबूत होगी और डायन हत्या जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी। अंत में समूह ने संकल्प लिया कि कस्टमरी कानून के पालन और ग्रामसभा में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास किया जायेगा।



