Ranchi News : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महासचिव एवं मीडिया प्रभारी कैलाश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में दलित, मजदूर, किसान और कमजोर वर्ग के लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करने का प्रयास कर रहा है।
बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया, संविधानिक दायरे से बाहर जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेजों को अमान्य कर दिया गया है और 11 विशेष दस्तावेजों की मांग की जा रही है। यादव का कहना है कि ये दस्तावेज आमतौर पर रोज कमाकर खाने वाले, पलायन करने वाले और गरीब लोगों के पास नहीं होते।
उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोग पलायन या रोजगार की तलाश में बाहर चले जाने के कारण वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे। इसका सीधा असर दलित, मजदूर और किसान वर्ग के लोगों पर पड़ेगा, जो राजद का परंपरागत जनाधार हैं।
कैलाश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था संवैधानिक रूप से स्वतंत्र होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह केंद्र की मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया भाजपा की राजनीतिक चाल है, जिससे वह विपक्ष के वोट बैंक को प्रभावित करना चाहती है।
उन्होंने आगे कहा कि आयोग का यह रवैया न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, बल्कि भारत के संविधान में दिए गए सार्वभौमिक मताधिकार के सिद्धांत के खिलाफ भी है। यादव ने मांग की कि चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए और सभी योग्य नागरिकों को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए। राजद ने इस मुद्दे पर जन आंदोलन चलाने की चेतावनी दी है यदि आयोग ने अपने रवैये में सुधार नहीं किया।



