Ranchi News : रांची जिला बार एसोसिएशन (RDBA) ने डालसा (DLSA) की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार, 11 अगस्त को बार भवन में आयोजित बैठक में असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस लॉयर्स (ALADC) की चयन प्रक्रिया, मध्यस्थता केंद्र के मध्यस्थों को केस आवंटन में पारदर्शिता और बार सदस्यों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में LADC वकील को छोड़कर बाकी सभी डालसा में कार्यरत वकील मौजूद थे।

बैठक की अध्यक्षता RDBA अध्यक्ष एसपी अग्रवाल ने की, जबकि महासचिव संजय कुमार विद्रोही ने निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से डालसा के निर्णयों का विरोध किया गया और सचिव के रवैये पर आपत्ति जताई गई। विशेषकर, मध्यस्थों को केस देने में “पिक एंड चूज” की नीति अपनाए जाने का आरोप लगा। सदस्यों का कहना था कि जब तक केस आवंटन में पारदर्शिता नहीं आएगी, काम सही दिशा में नहीं हो सकेगा।

बैठक में यह भी कहा गया कि लोक अदालत या अन्य कार्यक्रमों में RDBA सदस्यों को जो मान-सम्मान दिया जाता था, वह अब नहीं मिल रहा है। पहली बार इस मुद्दे पर बैठक होने के कारण कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया, लेकिन एक सप्ताह बाद पुनः बैठक कर आगे की रणनीति तय करने की बात कही गई।

ALADC की चयन प्रक्रिया पर भी बार एसोसिएशन ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि चयन में केवल स्थानीय अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जानकारी के अनुसार, डालसा ने पिछले सप्ताह 31 वकीलों का चयन किया था, जिसमें सिर्फ 12 ही RDBA से जुड़े हैं, जबकि बाकी अन्य बार के सदस्य हैं। इसको लेकर असंतोष साफ नजर आया।

बैठक में उपाध्यक्ष बीके राय, प्रशासनिक सचिव अभिषेक कुमार भारती, पुस्तकालय सचिव प्रदीप चौरसिया, कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार केसरी, सहायक कोषाध्यक्ष दीनदयाल सिंह, और कार्यकारिणी सदस्य शंकर कुमार शर्मा, असीम कच्छप, सोसन नाग, मनीष कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद थे। डालसा के पैनल वकील, मध्यस्थ और प्लीडर कमीशन भी बैठक में शामिल हुए, लेकिन डालसा में तैनात डिफेंस वकील अनुपस्थित रहे।

RDBA ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि डालसा का रवैया नहीं बदला तो आने वाले समय में कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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