Ranchi News : 16-06-2015 को एक प्रतिष्ठित स्थानीय दैनिक अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित खबर “जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं के छात्र बिना गुरु के कर रहे हैं पढ़ाई” ने जनजातीय भाषा समुदायों में हलचल मचा दी है। हालांकि, मुंडारी साहित्य परिषद ने इस खबर को भ्रामक बताया है और इससे छात्रों में भ्रम फैलने की आशंका जताई है।
अखबार में दावा किया गया कि कुड़ुख और नागपुरी को छोड़कर अन्य सभी सात जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में स्थायी शिक्षक नहीं हैं। जबकि तथ्य इसके बिल्कुल विपरीत हैं। परिषद की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, केवल जनजातीय भाषा हो और पंचपरगनिया में फिलहाल स्थायी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। बाकी भाषाओं, विशेष रूप से मुंडारी में, राज्य के कई कॉलेजों में पूर्णकालिक शिक्षक कार्यरत हैं।
परिषद द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार इन महाविद्यालयों में हैं मुंडारी के स्थायी शिक्षक
- रांची विमेंस कॉलेज, सरकुलर रोड, रांची।
- डोरंडा कॉलेज, डोरंडा, रांची।
- राम लखन सिंह यादव कॉलेज, कोकर, रांची।
- जगन्नाथ नगर कॉलेज, धुर्वा, रांची।
- पीपीके कॉलेज, बुंडू, रांची।
- सिमडेगा कॉलेज, सिमडेगा।
मुंडारी साहित्य परिषद ने कहा कि वर्तमान में नामांकन प्रक्रिया चल रही है और इस प्रकार की भ्रामक खबरों से छात्र-छात्राएं असमंजस में पड़ सकते हैं। इससे न सिर्फ उनकी शैक्षणिक दिशा प्रभावित हो सकती है, बल्कि जनजातीय भाषाओं के प्रति उनकी रुचि भी घट सकती है।
मुंडारी साहित्य परिषद ने अखबार से आग्रह किया है कि वे अपनी खबरों की पुष्टि संबंधित विभागों या कॉलेज प्रशासन से करने के बाद ही प्रकाशन करें, जिससे ऐसी संवेदनशील भाषायी विषयों पर गलत संदेश न जाए। परिषद ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और शिक्षक नियुक्तियों की प्रक्रिया भी निरंतर जारी है।



