रांची: झारखंड में प्राकृतिक संपदा की लूट, विशेषकर अवैध बालू खनन, परिवहन और इसके अवैध भंडारण को लेकर हेमंत सोरेन सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। राज्य में पिछले लंबे समय से बालू घाटों के संचालन में आ रही अड़चनों और बढ़ते अवैध कारोबार को देखते हुए खान विभाग ने अपनी सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में 11 मई को दोपहर 3 बजे एक राज्यस्तरीय टास्क फोर्स की अति महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

डिजिटल पहरेदारी : अब आसमान से रखी जाएगी नजर

इस बार खान विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा के निर्देशों के अनुसार, राज्य के सभी खनन पट्टों (Mining Leases) की ‘शेप फाइल’ तैयार की जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए सीधे तौर पर खनन क्षेत्रों की निगरानी की जा सकेगी। अगर किसी प्रतिबंधित क्षेत्र से बालू का उठाव होता है, तो विभाग को इसकी जानकारी तुरंत मिल जाएगी।

इसके अलावा, कोयला मंत्रालय के ‘खनन प्रहरी’ मोबाइल ऐप को भी हथियार बनाया जा रहा है। आम जनता इस ऐप के जरिए अवैध खनन की गुप्त सूचना दे सकेगी, जिस पर जिला प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, संवेदनशील रास्तों पर वाहन ट्रैकिंग सिस्टम, चेकपोस्ट का निर्माण और रेलवे साइडिंग जैसे मुख्य निकासी द्वारों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे ताकि बालू की हर ट्राली और ट्रक का रिकॉर्ड रखा जा सके।

क्यों फल-फूल रहा है अवैध कारोबार?

विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि राज्य के 16 जिलों में कुल 229 बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया तो पूरी हो चुकी है, लेकिन लीज डीड (पट्टा दस्तावेज) की प्रक्रिया अटकी हुई है। घाटों का कानूनी रूप से संचालन न होने के कारण निर्माण कार्यों के लिए बालू की किल्लत हो रही है, जिसका फायदा उठाकर बालू माफिया ऊंचे दामों पर अवैध रूप से बालू बेच रहे हैं।

कल की बैठक में होगा बड़ा फैसला

11 मई को होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी जिलों के उपायुक्त (DC), जिला खनन पदाधिकारी (DMO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और सफल बोलीदाता (Successful Bidders) शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा लंबित लीज डीड को जल्द से जल्द पूरा करना और कानूनी तरीके से बालू घाटों को चालू करना है। विभाग का मानना है कि जैसे ही अधिकृत घाटों से बालू की आपूर्ति शुरू होगी, अवैध बाजार अपने आप धराशायी हो जाएगा।

प्रशासनिक मुस्तैदी और चुनौतियां

झारखंड में बालू का अवैध कारोबार न केवल राजस्व की हानि है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए यह जरूरी है कि खनन केवल स्वीकृत मानदंडों के अनुसार हो। विभाग की इस नई पहल से उम्मीद जगी है कि झारखंड में बालू की कालाबाजारी बंद होगी और आम लोगों को वाजिब दाम पर बालू मिल सकेगा।

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