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Tips & Tricks: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा संस्कारी और शांत स्वभाव का हो। लेकिन कई बार बच्चे बात-बात पर चिल्लाने लगते हैं, सामान फेंकते हैं या जिद्द करने लगते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों में आत्मसम्मान (Self-esteem) की भावना 3 से 4 साल की उम्र में ही विकसित होने लगती है। ऐसे में उन्हें दूसरों के सामने डांटना या मारना उनके कोमल मन पर गहरा घाव छोड़ सकता है।
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मारपीट समाधान नहीं, समस्या है
अगर आप बच्चे को किसी के सामने चिल्लाकर या मारकर समझाते हैं, तो इससे उसका आत्मसम्मान आहत होता है। नतीजा यह होता है कि बच्चा और ज्यादा विद्रोही हो जाता है। वह आपसे कुछ भी नया सीखने के बजाय आपसे दूर होने लगता है। अगर बच्चा गलती करे, तो उसे अकेले में ले जाकर प्यार से समझाएं कि उसकी बात क्यों गलत थी।
गलतियों को सुधारने का मौका दें
बचपन गलतियों का ही दूसरा नाम है। छोटी-सी गलती पर हाथ उठाना बच्चे के मन में आपके प्रति सम्मान कम कर देता है। वह चिड़चिड़ा हो जाता है और उसे लगने लगता है कि गुस्सा करना ही अपनी बात मनवाने का एकमात्र तरीका है। मारपीट के बजाय उन्हें उनकी गलती का अहसास कराएं और उसे सुधारने के लिए प्रेरित करें।
निगरानी रखें, लेकिन जासूसी नहीं
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सामाजिक व्यवहार: अगर आपका बच्चा दोस्तों से जल्दी झगड़ता है, तो इसकी अनदेखी न करें।
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फीडबैक: स्कूल टीचर या बस ड्राइवर से समय-समय पर बच्चे के व्यवहार के बारे में पूछें। इससे आपको पता चलेगा कि बच्चा घर के बाहर कैसा व्यवहार कर रहा है।
किताबी कीड़ा न बनाएं, व्यवहारिक ज्ञान दें
अक्सर मां-बाप चाहते हैं कि बच्चा हर वक्त पढ़ाई में लगा रहे। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन हर वक्त का दबाव बच्चे को ‘हाइपर एक्टिव’ और चिड़चिड़ा बना देता है। अगर बच्चा पढ़ाई में अच्छा है, तो उसे खेलने और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका दें। उन्हें बड़ों का सम्मान करना, दूसरों की मदद करना और अपनी भावनाओं को काबू में रखना जैसे व्यवहारिक ज्ञान देना ज्यादा जरूरी है।
याद रखें, बच्चा वही करता है जो वह आपको करते हुए देखता है। अगर आप शांत रहेंगे, तो आपका बच्चा भी धैर्यवान बनेगा।



