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Tips & Tricks: स्कूल से घर लौटते ही बच्चों और होमवर्क के बीच जो ‘कोल्ड वार’ शुरू होती है, उससे हर मां-बाप वाकिफ हैं। होमवर्क कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि बच्चों के पास इससे बचने के हजार बहाने तैयार रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डांट और दबाव की जगह अगर कुछ स्मार्ट तरीके अपनाए जाएं, तो आपका बच्चा खुशी-खुशी अपनी नोटबुक उठा लेगा।
भरोसा जीतें और प्रेरित करें
अक्सर अभिभावक बच्चों से काम पूरा करने के बदले इनाम का वादा करते हैं और फिर भूल जाते हैं। ऐसा करने से बच्चा आप पर भरोसा खो देता है और पढ़ाई के प्रति उदासीन हो जाता है। बच्चे को प्रोत्साहित करें और उसकी छोटी-छोटी सफलताओं का जश्न मनाएं। हमेशा अपनी सुविधा न देखें, बल्कि बच्चे के मूड और थकान का भी ख्याल रखें। उनके साथ समय बिताना उन्हें सुरक्षित महसूस कराता है।
जिम्मेदारी का अहसास कराएं, खुद न करें काम
कई बार मां-बाप प्यार में बच्चे का होमवर्क खुद ही पूरा कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत बच्चे के विकास के लिए हां की जगह नुकसानदायक है। उन्हें होमवर्क की अहमियत समझाएं और इसे उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनाएं। कोर्स की किताबों के अलावा उन्हें रोचक कहानियों की किताबें लाकर दें, ताकि उनमें पढ़ने की जिज्ञासा जगे।
नियमित अभ्यास और रूटीन का जादू
पढ़ाई का एक निश्चित समय तय करना बहुत जरूरी है। चाहे स्कूल से काम मिला हो या नहीं, उस तय समय पर बच्चे को टेबल पर बैठने की आदत डालें। लिखने का अभ्यास उनकी याददाश्त और हैंडराइटिंग दोनों सुधारता है। सबसे महत्वपूर्ण बात—जब बच्चा पढ़ रहा हो, तो उसके साथ बैठें। उस समय खुद फोन पर बात करना या रसोई में व्यस्त हो जाना बच्चे का ध्यान भटका सकता है।
पढ़ाई को बनाएं डिजिटल और रोचक
किताबी ज्ञान को हकीकत से जोड़ें। यदि आप बच्चे को ‘बटरफ्लाई’ (तितली) का जीवन चक्र पढ़ा रही हैं, तो केवल चित्र न दिखाएं। यूट्यूब पर उससे जुड़े दिलचस्प वीडियो दिखाएं या चार्ट पेपर पर कलरफुल डायग्राम बनवाएं। जब बच्चा चीजों को अपनी आंखों से बदलते देखता है, तो वह उसे जल्दी सीखता है। पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि एक खोज जैसा बनाएं। याद रखें, दबाव डालने से बच्चा डरकर पढ़ाई से दूर भाग सकता है, जबकि प्यार और सही रूटीन उसे भविष्य के लिए तैयार करेगा।

