Ranchi News : राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का जनाधार निरंतर बढ़ता जा रहा है। रांची जिले के अंतर्गत भाजपा रातू मंडल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने रविवार को झामुमो का दामन थाम लिया। इस सामूहिक सदस्यता अभियान का आयोजन हरमू स्थित झामुमो कैंप कार्यालय में किया गया, जिसका नेतृत्व पार्टी के रांची जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम ने किया।
इस मौके पर पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने सभी नव-शामिल कार्यकर्ताओं को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर विधिवत सदस्यता दिलाई। पांडेय ने कहा कि झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के आदर्श और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व ने राज्यवासियों का विश्वास जीता है, जिससे पार्टी का विस्तार हो रहा है।
उन्होंने सभी नए सदस्यों को पार्टी की विचारधारा, सिद्धांतों और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही उन्हें राज्य निर्माण और विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प भी दिलाया।
जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम ने कहा कि रातू के लोगों ने जो स्नेह और विश्वास दिखाया है, उससे झामुमो और मजबूत होकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल पार्टी की सदस्यता नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है।
इस अवसर पर भाजपा रातू मंडल से पार्टी छोड़कर झामुमो में शामिल होने वालों में कई प्रमुख नाम भी शामिल रहे। इनमें पूर्व भाजपा मंत्री अविनाश लकड़ा, अमित सिंह, पंकज साहू, अभिषेक कुमार, प्रकाश उरांव, वार्ड सदस्य ममता कुमारी, अनीता देवी, शोभा कुमारी, रेखा देवी, मंगरा उरांव, तिग्गा, महेंद्र सिंह, अमर सिंह, कुंदन सिंह, सुक्खू उरांव, अशोक गुप्ता, अजय मिर्धा, बबलू लोहरा, अलबेला लकड़ा, अनुभव यादव, बादल मिर्धा, अनूप लकड़ा सहित अन्य सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
विशेष बात यह रही कि इस सदस्यता अभियान में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं, जो आने वाले दिनों में झामुमो की महिला इकाई को भी मजबूती देने का संकेत है।
झामुमो नेताओं ने नए सदस्यों से अपील की कि वे न केवल पार्टी के विस्तार में सहयोग दें, बल्कि सरकार की जनहितकारी नीतियों को घर-घर तक पहुंचाएं। साथ ही पार्टी की नीतियों के अनुरूप संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करें।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज़ से झामुमो के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकता है, वहीं भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का विषय बन गया है। झारखंड की राजनीति में यह स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्रीय दलों की पकड़ और जनसंपर्क नीति एक बार फिर से जनता का भरोसा जीत रही है।



