Ranchi News : झारखंड में खड़िया समाज के अधिकारों की अनदेखी को लेकर रांची में रांची खड़िया महासभा की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में खड़िया समाज की भाषा, संस्कृति, शिक्षा और सरकारी नौकरी में हिस्सेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। सिमडेगा और गुमला जिलों से आए कई प्रतिनिधियों और सदस्यों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक में यह आरोप लगाया गया कि खड़िया समाज द्वारा राज्यपाल, सरकार, स्थानीय विधायकों और विभिन्न सरकारी विभागों को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद झारखंड सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। खड़िया समाज के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिससे समाज में रोष है।
रांची खड़िया महासभा के अध्यक्ष कुलभूषण डुँगडुँग और सचिव सीरिल इंदवार ने कहा कि अब समय आ गया है कि खड़िया समाज के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर सरकार को चेताया जाए। उन्होंने धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि अब शांत बैठने का समय नहीं है।
बैठक में डॉ. चंद्र किशोर केरकेट्टा, अखिल भारतीय खड़िया माहा डोकलो के महासचिव कुलकांत केरकेट्टा, ऑलफोंस डुँगडुँग, वीर तेलंगाना स्मारक समिति के अध्यक्ष कालोडिया सोरेंग, मतियस कुल्लू, एफ्रेम बाः, रतिया खड़िया, अनिमा बाः और तारकेलेन जैसे प्रमुख सामाजिक नेताओं ने भी अपनी बातें रखीं और खड़िया समाज की एकता व जागरूकता पर बल दिया।
इस बैठक में खड़िया समाज की परंपरा और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया गया, जो समाज में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का कार्य करेगी।
रांची में हुए इस महासभा में समाज की एकजुटता और जागरूकता की नई मिसाल पेश की गई और सरकार को यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि खड़िया समाज अब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार है।



