सेंट पीटर्सबर्ग, (रूस) | एजेंसी
अमेरिका के साथ जारी तनावपूर्ण युद्धविराम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराकाची सोमवार को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे। रूसी अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर मध्य पूर्व में गहराते संकट पर साझा रणनीति बनाना है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह दौरा तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शांति वार्ता के प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Read more: पुतिन के साथ ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन, ईरानी विदेश मंत्री के दावे से मचा हड़कंप
क्या बदलेगा मिडिल ईस्ट का समीकरण?
ईरान और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य संघर्ष के बाद तेहरान अब रूस के प्रभाव का सहारा ले रहा है। अराकाची इससे पहले पाकिस्तान और ओमान का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत से इनकार कर दिया था। रूस, ईरान का सबसे करीबी सहयोगी होने के नाते उसे हथियार, खुफिया जानकारी और कूटनीतिक समर्थन दे रहा है। पुतिन के साथ होने वाली इस चर्चा के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव रहने वाले हैं।
तेल और सुरक्षा पर बड़ी डील संभव
यह यात्रा ईरान की ‘पूर्व की ओर झुकाव’ वाली नीति का हिस्सा है। रूस पहले ही ईरान को एस-400 मिसाइल सिस्टम दे चुका है, जो अमेरिकी हमलों के खिलाफ सुरक्षा कवच बने हुए हैं। बैठक में आर्थिक साझेदारी, BRICS सदस्यता और यूक्रेन संकट पर भी सहयोग मांगा जा सकता है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश जरूर की है, लेकिन ईरान ने फिलहाल अमेरिका से सीधी बातचीत टाल दी है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं।
Read more: ईरान के चक्रव्यूह में फंसे डोनाल्ड ट्रंप, क्या अब युद्धविराम ही आखिरी रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन और अराकाची के बीच होने वाले इस शिखर सम्मेलन से अमेरिका को कड़ा संदेश जाएगा। ट्रंप प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद रूस-ईरान गठबंधन रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में नए समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकता है। सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक परिवेश में होने वाली यह कूटनीति मिडिल ईस्ट में शांति और शक्ति संतुलन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
रक्षा समझौते और वैश्विक बाजार: पुतिन-अराकाची वार्ता
रूसी राजदूत ने मॉस्को में बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक समझौतों की उम्मीद है। ईरान को उम्मीद है कि रूस के कूटनीतिक हस्तक्षेप से क्षेत्र में उसकी स्थिति मजबूत होगी। इस रणनीतिक दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसके नतीजे तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर सीधा असर डालेंगे।



