जकार्ता, (इंडोनेशिया) | एजेंसी

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता आज पूरी तरह से नृत्य के रंगों में सराबोर नजर आई। इंटरनेशनल डांस डे के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में नर्तकों ने अपनी कला से समां बांध दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी नर्तकियों ने जब मंच पर कदम रखे, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। यह आयोजन 29 अप्रैल को मनाए जाने वाले वैश्विक दिवस की पूर्व संध्या का हिस्सा था, जिसमें इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विविधता को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया।

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इस उत्सव का मुख्य आकर्षण पारंपरिक ‘गैमेलन’ संगीत की थाप पर थिरकते सैकड़ों कलाकार थे। स्थानीय नर्तकों ने पेंडेट (Pendet), लेगोंग (Legong) और समन (Saman) जैसे लोकप्रिय लोक नृत्यों के जरिए अपनी जड़ों की मजबूती का अहसास कराया। कार्यक्रम में न केवल अनुभवी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अतिथियों ने भी ‘मॉडर्न फ्यूजन डांस’ पेश कर दर्शकों का दिल जीत लिया। आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन लोक कला और संस्कृति से गहराई से जुड़ पाती है।

इंटरनेशनल डांस डे की शुरुआत 1982 में अंतरराष्ट्रीय थिएटर इंस्टीट्यूट द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य कला के माध्यम से दुनिया भर में शांति और एकता का संदेश फैलाना है। जकार्ता में हुए इस कार्यक्रम ने सूरकार्ता जैसे सांस्कृतिक शहरों की परंपरा को आगे बढ़ाया है। स्थानीय सरकार के सहयोग से आयोजित इस इवेंट में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद थे। कलाकारों ने नृत्य के जरिए न केवल मनोरंजन किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक एकता की शपथ भी ली।

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भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए आयोजकों ने बताया कि अगले वर्ष जकार्ता में 24 घंटे लगातार चलने वाले एक विशाल नृत्य महोत्सव की तैयारी की जा रही है। यह पहल वैश्विक स्तर पर इंडोनेशिया की ‘सॉफ्ट पावर’ को और अधिक मजबूती देगी। सोशल मीडिया पर भी इस कार्यक्रम के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें दुनिया भर के कला प्रेमियों द्वारा सराहा जा रहा है। कुल मिलाकर, जकार्ता के इस डांस डे ने पूरे शहर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।

सांस्कृतिक एकता और युवा जोश: जकार्ता डायरी

आयोजन के दौरान जकार्ता पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि यह उत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इंडोनेशिया की पहचान को बचाने की एक कोशिश है। नर्तकों के उत्साह और दर्शकों की तालियों ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी लोक कलाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। इस कार्यक्रम ने जकार्ता के सांस्कृतिक केंद्र को एक वैश्विक मंच में तब्दील कर दिया।

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