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रांची: राजधानी के निजी स्कूलों में शिक्षा को व्यापार बनाने और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली प्रवृत्तियों पर जिला प्रशासन ने नकेल कस दी है। सोमवार को समाहरणालय स्थित एनआईसी सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में ‘जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति’ की पहली महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में ‘झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017’ के कड़े अनुपालन का निर्देश देते हुए स्कूलों के लिए नई लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है।
फीस वृद्धि पर लगा ‘ब्रेक’
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि कोई भी निजी विद्यालय अपनी मर्जी से बेतहाशा फीस नहीं बढ़ा सकेगा। अब स्कूल अपनी आंतरिक शुल्क समिति की सहमति से अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकते हैं, जिसकी सूचना जिला समिति को देनी होगी। यदि कोई स्कूल 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे जिला स्तरीय समिति से पूर्व अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह शुल्क वृद्धि कम से कम दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी, ताकि अभिभावकों को हर साल के झटके से बचाया जा सके।
किताबों और ड्रेस के ‘सिंडिकेट’ पर प्रहार
अक्सर देखा जाता है कि स्कूल किसी खास दुकान से ही किताबें या ड्रेस खरीदने का दबाव बनाते हैं। प्रशासन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि:
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CBSE स्कूल NCERT के अलावा किसी अन्य प्रकाशक की सहायक पुस्तकें अनिवार्य नहीं कर सकते।
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पुस्तकों और ड्रेस के डिजाइन में कम से कम 5 साल तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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स्कूल परिसर का उपयोग व्यावसायिक बिक्री (ड्रेस-किताबों की बिक्री) के लिए नहीं किया जा सकेगा।
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अभिभावक खुले बाजार से ड्रेस सिलवाने या खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। स्कूल को केवल रंग और डिजाइन का विवरण सार्वजनिक करना होगा।
पुनः नामांकन और परिवहन शुल्क पर स्पष्टीकरण
बैठक में निर्णय लिया गया कि अगली कक्षा में प्रमोशन के नाम पर स्कूलों द्वारा लिया जाने वाला ‘री-एडमिशन फीस’ (पुनः नामांकन शुल्क) पूरी तरह अवैध है। साथ ही, परिवहन शुल्क में वृद्धि भी सामान्य शुल्क वृद्धि के नियमों के अधीन होगी और बसों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा। किसी भी छात्र को फीस के कारण परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकेगा।
शिकायत के लिए ‘अबुआ साथी’ की मदद
अभिभावकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन ने ‘अबुआ साथी’ व्हाट्सएप नंबर— 9430328080 जारी किया है। इसके अलावा समाहरणालय के कमरा संख्या 105 में लिखित शिकायत भी दी जा सकती है। क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी सुश्री जुही रानी को इस कार्य के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
भारी जुर्माने की चेतावनी
उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो अधिनियम के तहत उन पर ₹50,000 से लेकर ₹2.5 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता (RTE अनापत्ति) भी रद्द की जा सकती है।
इस बैठक में रांची के सांसद और विधायक प्रतिनिधियों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और अभिभावक संघ के सदस्य भी मौजूद रहे। प्रशासन की इस पहल से रांची के हजारों परिवारों को बड़ी वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।

