World News: दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आई है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान की कुख्यात एजेंसी आईएसआई (ISI) ने भारत के खिलाफ अपनी नापाक साजिशों को अंजाम देने के लिए अब बांग्लादेश को अपना नया ‘वार रूम’ बना लिया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल अब भारत विरोधी अभियानों के लिए एक सुरक्षित गेटवे के रूप में किया जा रहा है।

‘मोहाजिर रेजिमेंट’ और आत्मघाती हमलों का ब्लूप्रिंट

खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, आईएसआई की ढाका सेल ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए ‘मोहाजिर रेजिमेंट’ नामक एक विशेष खतरनाक इकाई तैयार की है। इसमें 18 से 40 वर्ष की आयु के पुरुष और महिला ऑपरेटिव्स को शामिल किया गया है। ये आतंकी आईईडी (IED) बनाने और आत्मघाती हमलों को अंजाम देने में पेशेवर रूप से प्रशिक्षित हैं। गणतंत्र दिवस समारोहों को देखते हुए इन्हें पश्चिम बंगाल सीमा के रास्ते भारत में घुसपैठ कराने की बड़ी योजना बनाई गई है।

यूनुस सरकार की परोक्ष अनुमति और पुराना नेटवर्क

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार ने कट्टरपंथी ताकतों को वैचारिक और लॉजिस्टिक आधार पर काम करने की परोक्ष छूट दे दी है। इसके चलते लश्कर-ए-तैयबा और बांग्लादेश के स्थानीय आतंकी संगठनों के बीच के वे संबंध फिर से जिंदा हो गए हैं, जो पिछले कई सालों से सुप्त अवस्था में थे। लश्कर संस्थापक हाफिज सईद के करीबी मुफ्ती हारून इजहार और मुफ्ती जशिमुद्दीन रहमानी जैसे चेहरे अब फिर से सक्रिय होकर भारत विरोधी गतिविधियों को खाद-पानी दे रहे हैं।

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भारतीय दूतावास और बंगाल निशाने पर

आईएसआई की यह साजिश केवल सीमा पार घुसपैठ तक सीमित नहीं है। इनपुट के अनुसार, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों को निशाना बनाने की तैयारी है। 2024 में बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद उपजे हालात ने इन आतंकी नेटवर्कों के लिए एक खाद-पानी का काम किया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ढाका ने समय रहते इन गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई, तो यह स्थिति पूरे दक्षिण एशिया की शांति को भंग कर सकती है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब इस ‘ढाका मॉडल’ की बारीकी से निगरानी कर रही हैं।

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