Tehran (Iran): होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर बारूद के ढेर में तब्दील हो गया है। ईरान और अमेरिका के बीच हुई इस ताजा सैन्य भिड़ंत ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के तीन नौसैनिक जहाजों पर भीषण हमला कर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। कुछ सैन्य विशेषज्ञों ने इस अचानक हुए हमले की भयावहता को दूसरे विश्व युद्ध के ‘पर्ल हार्बर’ जैसा करार दिया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन दावों को खारिज करते हुए अपनी जवाबी कार्रवाई को अधिक प्रभावी बताया है।
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कैसे शुरू हुआ समंदर में संग्राम?
इस खूनी संघर्ष की शुरुआत संघर्षविराम के उल्लंघन के आरोपों से हुई। ईरान की मिलिट्री कमांड का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने पहले उनके दो जहाजों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरानी सेना ने चाबहार पोर्ट के दक्षिण में तैनात अमेरिकी नौसेना के बेड़े पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन से हमला बोल दिया। ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में अमेरिकी नौसेना को अपूरणीय क्षति हुई है और उनके जहाजों को खदेड़ दिया गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का खंडन
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने नुकसान की खबरों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है। अमेरिका के अनुसार, उनके तीन डिस्ट्रॉयर—यूएसएस ट्रक्सटन (USS Truxtun), यूएसएस राफेल पेराल्टा (USS Rafael Peralta) और यूएसएस मेसन (USS Mason)—पूरी तरह सुरक्षित हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया और जवाबी हमले में उन ठिकानों को जमींदोज कर दिया जहां से ड्रोन लॉन्च किए गए थे।
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ट्रंप की ‘लव टैप’ और कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी घटना को ‘छोटा झटका’ बताते हुए शांत रहने की कोशिश की। उन्होंने एक इंटरव्यू में ईरानी बंदरगाहों पर की गई अमेरिकी बमबारी को “लव टैप” का नाम दिया और कहा कि उनके तीनों जहाज सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में ईरान को आगाह किया कि यदि शांति समझौता जल्द सिरे नहीं चढ़ा, तो अमेरिका का अगला कदम इससे कहीं अधिक हिंसक और विनाशकारी होगा।
शांति समझौते पर सवालिया निशान
हैरानी की बात यह है कि यह टकराव उस समय हुआ जब दोनों देश एक शांति समझौते के बेहद करीब माने जा रहे थे। अमेरिका ने युद्ध समाप्ति के लिए तीन चरणों वाला प्रस्ताव भी दिया है। अब इस ताजा सैन्य झड़प ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है कि क्या अब भी वार्ता सफल हो पाएगी या यह केवल एक बड़े युद्ध की शुरुआत है। फिलहाल ईरान के तटीय इलाकों में स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा है।
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