Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने पेसा एक्ट की नियमावली लागू नहीं करने को लेकर राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बुधवार को मुख्य सचिव और पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना का नोटिस जारी किया है और 5 अगस्त 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई के बाद की गई। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने साफ कहा कि जुलाई 2024 में ही अदालत ने सरकार को दो महीने के भीतर पेसा नियमावली बनाकर लागू करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक उस आदेश का पालन नहीं हुआ है।

प्रार्थी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि झारखंड राज्य को बने 25 वर्ष हो गए, जिसका गठन आदिवासी समुदायों के अधिकारों और विकास के लिए किया गया था। बावजूद इसके, सरकार पेसा एक्ट 1996 के तहत जरूरी नियमावली नहीं बना सकी है, जो ग्राम सभा को अधिकार संपन्न बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पेसा एक्ट को लागू करने की प्रक्रिया चल रही है और वर्तमान में पंचायती राज अधिनियम व अन्य कानूनी प्रावधानों के माध्यम से कुछ प्रावधानों को लागू किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से थोड़ा और समय देने की मांग की और कहा कि अगली सुनवाई में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जाएगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली तिथि तक ठोस जवाब नहीं आया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राज्य में आदिवासी स्वशासन और अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा है, जिसे लेकर जनजातीय समुदाय में गहरी चिंता है।

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