Ranchi News : राजधानी रांची के संवेदनशील हिंदपीढ़ी इलाके में हुई मारपीट की एक बड़ी घटना को लेकर अदालत में अहम फैसला सामने आया है। अप्पू उर्फ इरशाद की बेरहमी से पिटाई मामले में जेल में बंद आरोपी आसिफ हुसैन की जमानत याचिका सिविल कोर्ट ने खारिज कर दी है। वह पूर्व पार्षद मो. असलम का भाई है, जो खुद भी इस मामले में आरोपी है।

जानकारी के अनुसार, आसिफ हुसैन ने 16 जून 2025 को कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। इस पर सुनवाई न्यायायुक्त की अदालत में की गई, जिसमें अदालत ने यह मानने से इनकार कर दिया कि वह जमानत का हकदार है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में ही रखने का आदेश दिया।

आसिफ हुसैन ने इस मामले में 12 जून को अदालत में आत्मसमर्पण किया था और तभी से वह जेल में बंद है। वहीं, इस घटना के दूसरे आरोपी पूर्व पार्षद मो. असलम ने 27 जून को कोर्ट में सरेंडर किया। पुलिस की लगातार दबिश और सख्त कार्रवाई को देखते हुए दोनों ने खुद को न्यायालय के हवाले करना ही बेहतर समझा।

पूरा मामला 22 जनवरी 2025 का है, जब हिंदपीढ़ी निवासी मो. कलीम पर जानलेवा हमला किया गया था। पीड़ित को गंभीर हालत में रांची के रिम्स (राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ही उसका बयान दर्ज किया गया, जिसमें उसने हमलावरों के तौर पर मो. असलम और उसके भाई आसिफ हुसैन का नाम लिया था। इसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 307 (हत्या की कोशिश) समेत कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।

पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि दोनों आरोपियों ने मिलकर पहले कलीम को निशाना बनाया और फिर अप्पू उर्फ इरशाद की बेरहमी से पिटाई की। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था, लेकिन पुलिस की तत्परता से माहौल को नियंत्रित किया गया।

दोनों आरोपी लंबे समय तक फरार रहे, जिससे पुलिस पर लगातार दबाव बना रहा। अंततः अदालत में आत्मसमर्पण के बाद अब दोनों न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस ने चार्जशीट की तैयारी भी शुरू कर दी है।

इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है, वहीं पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद है। पूरे मामले की अगली सुनवाई में अहम तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे केस की दिशा तय होगी। पुलिस का कहना है कि वह मामले को मजबूत साक्ष्यों के साथ अदालत में पेश करेगी।

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