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Astrology News: रंगों और उमंग के त्योहार होली को लेकर राजधानी रांची के बाजारों और घरों में तैयारियां अभी से शुरू होने लगी हैं। इस साल होली की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति थी, जिसे शहर के प्रमुख विद्वानों और ज्योतिषियों ने अब सुलझा लिया है। पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष दो मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों वाली होली चार मार्च को देशभर में हर्षोल्लास के साथ खेली जाएगी।
भद्रा का साया और दहन का समय
पुरोहित मनोज पांडेय ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में होलिका दहन की परंपरा है। दो मार्च को शाम 5:18 बजे पूर्णिमा तिथि प्रवेश करेगी, लेकिन साथ ही भद्रा भी लग रही है। शास्त्रानुसार, भद्रा मुख का त्याग कर केवल पूंछ काल में ही दहन शुभ माना जाता है। इसलिए, रांची में होलिका दहन दो मार्च की मध्यरात्रि 12:50 बजे किया जाएगा।
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अलग-अलग पंचांग और परंपराएं : रांची की विविधता यहां की होली में भी दिखती है:
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मिथिला पंचांग: पंडित राजेंद्र पांडेय के अनुसार, तीन मार्च की सुबह 5:31 बजे होलिका दहन और भगवती पूजा होगी।
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बांग्ला समाज: पंडित चंचल मुखर्जी ने बताया कि बांग्ला समाज तीन मार्च को अबीर खेलकर ‘दोल उत्सव’ मनाएगा।
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सर्वत्र होली: पूरे भारत और रांची के आम जनमानस में चार मार्च को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धृति योग के शुभ संयोग में रंग खेला जाएगा।
फाल्गुन मास के अन्य प्रमुख व्रत-त्योहार : होली से पहले फाल्गुन का महीना कई और धार्मिक उत्सवों से भरा है:
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15 फरवरी: महाशिवरात्रि (भगवान शिव का महापर्व)
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27 फरवरी: आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी
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2 मार्च: होलिका दहन
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4 मार्च: होली (धुलेंडी)
पंडितों का कहना है कि इस बार होली पर धृति योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो समाज में धैर्य, दृढ़ संकल्प और स्थिरता लेकर आएगा। रंगों के इस त्योहार में विधि-विधान से होलिका पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।



