Jharkhand News: गुमला के चैनपुर अंचल के बुकमा गांव में इन दिनों जंगली हाथी का आतंक छाया हुआ है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं और उनकी सामान्य दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस हाथी ने न केवल घरों को निशाना बनाया है, बल्कि सरकारी स्कूल को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

राजकुमार उरांव के घर पर हमला: अनाज और सामान नष्ट

शुक्रवार रात करीब 11 बजे, बुकमा निवासी राजकुमार उरांव और उनके परिवार को एक खौफनाक अनुभव से गुजरना पड़ा। एक जंगली हाथी उनके घर की ओर आया और एस्बेस्टस शीट को खींचना शुरू कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले से सहम कर राजकुमार और उनका परिवार किसी तरह जान बचाकर घर से बाहर भागा। बाहर आकर उन्होंने देखा कि हाथी उनके घर में भारी तोड़फोड़ कर रहा था। हाथी ने घर की दीवार गिरा दी, जिससे घर में रखा सारा सामान और अनाज पूरी तरह नष्ट हो गया। राजकुमार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे और उनका परिवार अब बेघर हो गए हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

राज्यकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बुकमा को भी नहीं बख्शा

राजकुमार के घर को तोड़ने के बाद, हाथी ने पास ही स्थित राज्यकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बुकमा को भी अपना निशाना बनाया। हाथी ने स्कूल की खिड़कियों को तोड़ दिया और स्कूल में रखे पाँच बोरी चावल में से दो बोरी चावल खा गया। इसके अलावा, हाथी ने स्कूल की पुस्तकों, अलमारी और टेबल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और महत्वपूर्ण स्कूल के कागजातों को रौंद दिया। इस घटना से स्कूल में पढ़ाई बाधित हुई है और बच्चों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों में भय का माहौल और वन विभाग से अपील

इस घटना के बाद से बुकमा गांव में गहरा भय का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि बुकमा में जंगली हाथियों का प्रवेश अक्सर होता रहता है, जिससे उनकी जान-माल का खतरा बना रहता है। वे हर पल अपनी जान बचाने में लगे रहते हैं और रात में ठीक से सो भी नहीं पाते। ग्रामीणों ने वन विभाग से इस गंभीर समस्या पर तत्काल पहल करने की अपील की है। उनकी मुख्य मांग है कि वन विभाग हाथियों को भगाने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराए और भविष्य में इस तरह की जान-माल की क्षति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो उनके लिए गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा।

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