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Ranchi News : झारखंड वक्फ बोर्ड से जुड़ी अंजुमन इस्लामिया, रांची का कार्यकाल समाप्त होने में महज 29 दिन शेष है। बावजूद इसका त्रैवार्षिक चुनाव अब तक शरू नहीं किया जा सका है और ना ही इस चुनाव की तैयारियों का कोई ठोस संकेत दिख रहा है। चुनाव संयोजक की नियुक्ति तो कर दी गई है किंतु संयोजक की ओर से न तो इस दिशा में सकारात्मक शुरुआत हो पाई है और न ही चुनावी माहौल नजर आ रहा है। झारखंड वक्फ बोर्ड भी इस ओर आंख बंद किए हुए है। कई समाजसेवी कई बार वक्फ बोर्ड को इस बाबत जानकारी देकर चुनाव कराने को लेकर याचना तक कर चुके हैं लेकिन बोर्ड के कार्यपालक पदाधिकारी समेत संपूर्ण बोर्ड इस ओर मौन रहकर अपनी निष्क्रीय भूमिका निभा रहा है। इससे मुस्लिम समाज में गहरी नाराजगी है और वे ये सोच रहे हैं कि चुनाव समय पर और निष्पक्ष तरीके से हो पाएगा अथवा नहीं।
बोर्ड पर चुनाव टालने का आरोप
अंजुमन बचाओ मोर्चा के संयोजक और प्रसिद्ध समाजसेवी रमजान कुरैशी ने इस मुद्दे पर तीखा बयान देते हुए झारखंड वक्फ बोर्ड पर चुनाव टालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अंजुमन का चुनाव समय पर हो इसके लिए बोर्ड को दो बार ज्ञापन सौंप चुके हैं और चुनाव कराने का आग्रह किया है, बावजूद इस दिशा में अब तक कोई उचित कार्रवाई नहीं की जा सकी है। यदि चुनाव करवाने में विलंब हो रहा है तो बोर्ड अंजुमन को अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर क्रियान्वित करे ताकि मौजूदा कार्यसमिति आवाम के कोष का दुरुपयोग नहीं कर सके।
ग्रामीणों को अधिकारों से वंचित रखना बड़ा अन्याय
श्री कुरैशी ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद के सपनों का संगठन अंजुमन इस्लामिया ग्रामीण विकास और उनके उत्थान का समर्थन करता है बावजूद इसके गठन के 103 वर्ष बाद भी स्थानीय ग्रामीण अपने हक-अधिकार के लिए वर्तमान में भी संघर्षरत हैं। यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। ग्रामीणों को न तो अंजुमन इस्लामिया से अपेक्षित लाभ मिल पाया है और न ही उन्हें चुनाव में मतदान का अधिकार ही मिला है। उन्होंने इसे एक गहरी साजिश या गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया।
ग्रामीणों को मतदाता सूची में शामिल करें
श्री कुरैशी ने संगठन के बायलॉज का हवाला देते हुए कहा कि नगर पालिका से सटे ग्रामीणों को मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों को राजनीतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक लाभ होगा। उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। मतदान देकर वे भी स्वयं को अंजुमन का भाग समझेंगे और अंजुमन को मजबूत करने में अपनी सक्रीय भूमिका निभाएंगे। अंजुमन से जुड़ने के बाद वे यहां से संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी ले सकेंगे। उन्होंने मुस्लिम समाज से एकजुट होकर मौलाना अबुल कलाम आजाद के सपनों को साकार करने और अंजुमन इस्लामिया को सही मायनों में जनता का संगठन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बोर्ड ने समय रहते चुनाव नहीं कराया तो अंजुमन बचाओ मोर्चा क्रांतिकारी आंदोलन करने काे बाध्य होगा।

