रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को दिग्गज विधायक सरयू राय ने राज्य की औद्योगिक और कौशल विकास नीतियों पर तीखा प्रहार किया। श्रम और उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि यह विडंबना ही है कि देश का 40 प्रतिशत खनिज झारखंड में होने के बावजूद, हम अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में विफल रहे हैं। हमारे राज्य का कच्चा माल बाहर जा रहा है और यहाँ के हाथ खाली हैं।
नीतियों में बदलाव की सख्त जरूरत
सरयू राय ने सरकार को सुझाव दिया कि उद्योग नीति कोई ‘पत्थर की लकीर’ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर दो से तीन साल में उद्योग नीति की समीक्षा और उसमें बदलाव जरूरी है। यदि सरकार आधारभूत ढांचे (Infrastructure) को मजबूत नहीं करेगी, तो निवेशक यहाँ आने से कतराएंगे। उन्होंने जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर एक दिलचस्प तथ्य रखा कि उद्योगपतियों ने रैयतों से सीधे बात कर 8 हजार एकड़ जमीन ली है, जबकि सरकारी मशीनरी केवल 3 हजार एकड़ ही दिला पाई है। यह सरकारी तंत्र की सुस्ती को दर्शाता है।
इंजीनियरिंग की डिग्री पर उठाया सवाल
स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) पर बात करते हुए सरयू राय ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि 80 प्रतिशत इंजीनियरिंग छात्रों में वास्तविक तकनीकी कौशल की कमी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दुनिया Artificial Intelligence (AI), AGI और ChatGPT की ओर बढ़ रही है, हमारे ट्रेनिंग सेंटर अभी भी पुरानी तकनीकों में उलझे हैं। यदि युवाओं को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार नहीं किया गया, तो वे आधुनिक उद्योगों की प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे।
औद्योगिक परिदृश्य और रोजगार के आंकड़े
राय ने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान में झारखंड में टाटा जैसे 26 मेगा उद्योग और 18 हजार से अधिक सूक्ष्म एवं लघु इकाइयां (MSMEs) सक्रिय हैं। अब तक राज्य में लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे 63 हजार लोगों को रोजगार मिला है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा राज्य की क्षमता के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने मांग की कि सरकार केवल निवेश के दावों तक सीमित न रहे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और ठोस नीति बनाकर झारखंड को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करे।



