रांची: न्याय की पहुंच हर ग्रामीण के दरवाजे तक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। बेड़ो प्रखंड के ईटा पंचायत स्थित चेरिमा गांव में ‘डोर-टू-डोर’ विधिक जागरूकता सह जनसंपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह अभियान केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें कानून की ताकत से रूबरू कराने की एक जीवंत कोशिश थी।

इन गंभीर मुद्दों पर हुआ संवाद

झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु सामाजिक कुरीतियां रहीं। अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को मानव तस्करी जैसे संवेदनशील विषय पर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कैसे लालच के जाल में फंसाकर बच्चों और महिलाओं का शोषण किया जाता है। इसके साथ ही नशा उन्मूलन, बाल श्रम निषेध और निःशुल्क विधिक सहायता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कल्याणकारी योजनाओं की दी जानकारी

कानूनी बारीकियों के अलावा, टीम ने ग्रामीणों को सरकार की उन योजनाओं के बारे में भी बताया जो सीधे तौर पर उनके जीवन स्तर को सुधार सकती हैं। इसमें शामिल हैं:

  • प्री-लिटिगेशन प्रक्रिया: मुकदमेबाजी से पहले आपसी सुलह के तरीके।

  • सामाजिक सुरक्षा: पेंशन योजनाओं और आयुष्मान भारत योजना के लाभ लेने की प्रक्रिया।

  • बाल सुरक्षा: बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत।

14 मार्च को ‘लोक अदालत’ का निमंत्रण

डालसा की टीम ने आगामी 14 मार्च 2026 को रांची व्यवहार न्यायालय में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए भी ग्रामीणों को आमंत्रित किया। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि लोक अदालत के जरिए लोग अपने लंबित मामलों का त्वरित, निःशुल्क और आपसी सहमति से निपटारा करा सकते हैं। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि सामाजिक समरसता भी बनाए रखता है।

सतर्क समाज की अपील

कार्यक्रम में मौजूद पैरा-लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) और अधिवक्ताओं ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी और नशे जैसी समस्याओं को केवल कानून के जरिए नहीं, बल्कि समाज की सतर्कता से ही जड़ से मिटाया जा सकता है।

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