Gua News: पश्चिमी सिंहभूम जिले की गुवा लौह अयस्क खदान में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर सोमवार तड़के शुरू हुआ अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मानकी सुरेश चांपिया के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में खदान प्रभावित कई गांवों के मुंडा, मानकी, मुखिया और ग्रामीण शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक सेल प्रबंधन 500 स्थानीय बेरोजगार युवकों को रोजगार देने पर लिखित समझौता नहीं करता, तब तक खदान का संचालन पूरी तरह बाधित रहेगा।

ग्रामीणों ने गुवा खदान के मेन गेट, क्रशिंग प्लांट, लोडिंग प्वाइंट और रांजाबुरु क्षेत्र में आवाजाही रोक दी है। आंदोलन के कारण लौह अयस्क परिवहन और उत्पादन पर असर पड़ने लगा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खदान विस्तार और खनन गतिविधियों के कारण उनकी जमीन, जंगल और जल स्रोत प्रभावित हुए हैं, लेकिन बदले में स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिला। काशिया पेचा गांव के मंगता सुरीन ने कहा कि वर्षों से ग्रामीण प्रदूषण, विस्थापन और बेरोजगारी झेल रहे हैं, इसलिए अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि स्थायी रोजगार चाहते हैं।

ग्रामीणों ने कारो नदी में बह रहे कथित प्रदूषित “लाल पानी” का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि खदान से निकलने वाला गंदा पानी खेतों और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। आंदोलनकारियों ने झारखंड की 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन नीति को सख्ती से लागू करने तथा रांजाबुरु खदान में हैंड माइनिंग और मैनुअल रैक लोडिंग शुरू करने की मांग भी रखी है।

कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की मौजूदगी में सेल अधिकारियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। जानकारी के अनुसार प्रबंधन फिलहाल 25 लोगों को रोजगार देने की बात कह रहा है, जबकि आंदोलनकारी इसे अपर्याप्त बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सम्मानजनक संख्या में स्थानीय युवाओं की नियुक्ति नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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