Health Desk: आयुर्वेद की प्राचीन विधा में ऐसी कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों का जिक्र है, जो न केवल बीमारियों को जड़ से मिटाती हैं बल्कि शरीर की ‘इम्यूनिटी’ को भी लोहे जैसा मजबूत बना देती हैं। इन्हीं में से एक शक्तिशाली औषधि है विदारीकंद। इसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में भद्रकंद और पुष्पमूल के नाम से भी जाना जाता है। विदारीकंद मुख्य रूप से एक बेल (लता) होती है, जिसकी जड़ों में अदरक की तरह गांठें पाई जाती हैं। इन्हीं गांठों का चूर्ण या अर्क सेहत के लिए अमृत समान माना जाता है।
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गर्मियों में ठंडक और ताकत का संगम— विदारीकंद की तासीर प्राकृतिक रूप से ठंडी होती है। यही वजह है कि गर्मियों के मौसम में यह शरीर के भीतर की जलन को शांत करने और पित्त-वात दोष को संतुलित करने के लिए सबसे बेहतरीन औषधि मानी जाती है। अगर आप अक्सर शारीरिक कमजोरी, थकान या हड्डियों के दर्द से परेशान रहते हैं, तो रात के समय दूध के साथ विदारीकंद चूर्ण का सेवन आपकी मांसपेशियों को नई ताकत दे सकता है। हां, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, गैस और खट्टी डकारों से जूझ रहे लोगों के लिए इसे मिश्री और ठंडे दूध के साथ सुबह लेना किसी वरदान से कम नहीं है।
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प्रजनन स्वास्थ्य और सावधानी— आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अनुसार, विदारीकंद महिला और पुरुष दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को सुधारने में सक्षम है। बेहतर परिणामों के लिए अक्सर इसे अश्वगंधा और शतावरी के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस शक्तिशाली जड़ी-बूटी के सेवन में सावधानी भी जरूरी है। मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों को इसके सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह रक्त में शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को भी बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
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