Health Desk: विश्व योग दिवस की आहट के बीच भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग और प्राणायाम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ा रहा है। आजकल जिस तरह हवा में प्रदूषण और धूल बढ़ रही है, उससे सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, साइनस और ब्रोंकियल इन्फेक्शन जैसी समस्याएं घर-घर की कहानी बन गई हैं। ऐसे में मंत्रालय ने प्राचीन योग क्रिया ‘कपालभाति’ को अपनाने की सलाह दी है, जो श्वसन तंत्र को भीतर से साफ करने और ऑक्सीजन लेवल सुधारने का सबसे शक्तिशाली जरिया है।

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फेफड़ों की सर्विसिंग है कपालभाति—  कपालभाति को केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि फेफड़ों की ‘क्लींजिंग’ प्रक्रिया माना जाता है। इस क्रिया में तेजी से सांस छोड़नी पड़ती है, जिससे फेफड़ों के कोनों में जमा पुरानी हवा और विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकल जाते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से सांस की नलियों में जमा बलगम साफ होता है और सूजन कम होती है। हां, जिन लोगों को साइनसाइटिस, राइनाइटिस या अस्थमा की शिकायत है, उनके लिए यह क्रिया किसी औषधि से कम नहीं है क्योंकि यह ब्रोंकियल मार्ग को खोलती है।

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ऊर्जा का संचार और विशेषज्ञों की राय—  हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कपालभाति न केवल श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है, बल्कि मस्तिष्क को भी तरोताजा रखती है। सुबह खाली पेट इसे करने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि शुरुआत हमेशा कम चक्रों से करें और धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं। हालांकि, ध्यान रहे कि कपालभाति हमेशा खाली पेट ही की जानी चाहिए। यदि आप किसी गंभीर हृदय रोग या हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं, तो योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास शुरू करना उचित होगा।

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