Tokyo: जापान के घने जंगलों से कीट विज्ञान (Entomology) का एक ऐसा सच सामने आया है जिसने जीव विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों को हिलाकर रख दिया है। वैज्ञानिकों ने चींटियों की एक ऐसी दुर्लभ प्रजाति ‘टेम्नोथोरैक्स किनोमुराई’ (Temnothorax kinomurai) की खोज की है, जिसकी पूरी कॉलोनी केवल रानियों से बनी होती है। इस समाज में न तो मेहनत करने वाले मजदूर होते हैं और न ही प्रजनन के लिए नरों की जरूरत पड़ती है।
बिना नर के क्लोनिंग और प्रजनन
यूनिवर्सिटी ऑफ रेगेन्सबर्ग के शोधकर्ताओं ने लैब में विश्लेषण के दौरान पाया कि ये चींटियां ‘पार्थेनोजेनेसिस’ (Parthenogenesis) प्रक्रिया के जरिए प्रजनन करती हैं। इसका अर्थ है कि रानियां बिना किसी नर के संपर्क के ही अंडे देती हैं, जिनसे उनकी अपनी हूबहू नकल यानी ‘क्लोन’ पैदा होते हैं। माइक्रोस्कोपिक जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि इनकी पूरी वंशावली बिना नरों के ही सदियों से चली आ रही है।
खतरनाक रणनीति: दूसरी प्रजाति को बनाती हैं गुलाम
चूंकि इस प्रजाति में मजदूर वर्ग नहीं होता, इसलिए ये भोजन और घोंसले के लिए दूसरी प्रजाति ‘टेम्नोथोरैक्स माकोरा’ पर निर्भर रहती हैं। इनकी जीवनशैली बेहद शातिर है:
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घुसपैठ: युवा रानियां चोरी-छिपे दूसरी प्रजाति के घोंसले में घुसती हैं।
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तख्तापलट: ये अपनी जहरीली डंक से वहां की रानी को मार देती हैं या वहां के मजदूरों को इस कदर भ्रमित करती हैं कि वे खुद अपनी रानी की हत्या कर देते हैं।
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गुलामी: कब्जे के बाद, किनोमुराई रानियां वहां के मजदूरों को अपना गुलाम बना लेती हैं और उनसे अपनी संतानों की देखभाल करवाती हैं।
विकास का नया अध्याय
‘करंट बायोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, यह प्रजाति सामाजिक परजीविता (Social Parasitism) के चरम स्तर पर है। जर्मन वैज्ञानिक जुर्गन हेंज के मुताबिक, इस प्रजाति की सभी संततियां रानी ही बनती हैं, जिससे इन्हें नए घोंसलों पर कब्जा करने और अपनी आबादी तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है। यह खोज दिखाती है कि प्रकृति में अस्तित्व बचाने के लिए जीव किसी भी हद तक विकास (Evolution) कर सकते हैं।



