Washington, (USA): अमेरिका और ईरान के बीच धधक रही युद्ध की ज्वाला अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुमानों से कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो रही है। पेंटागन द्वारा जारी ताजा और दर्दनाक आंकड़ों ने व्हाइट हाउस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खबर है कि ईरान के हमले में घायल एक और अमेरिकी जांबाज ने दम तोड़ दिया है, जिससे इस खूनी संघर्ष में अब तक शहीद हुए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह सैनिक 1 मार्च को सऊदी अरब स्थित सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुआ था। उसे इलाज के लिए जर्मनी भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन शनिवार रात जिंदगी की जंग हार गया। यह क्षति ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति ट्रंप अभी कुछ दिन पहले ही कुवैत हमले में मारे गए छह सैनिकों के पार्थिव शरीरों को कंधा देकर लौटे हैं।
धराशायी हुआ ट्रंप प्रशासन का आकलन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ताकत को कम आंकने की बड़ी भूल की है। वॉशिंगटन को उम्मीद थी कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान नेतृत्वहीन होकर घुटने टेक देगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। ईरान ने न केवल अपनी सैन्य कमर टूटने के दावों को झूठा साबित किया है, बल्कि उसकी नई युद्ध नीति ने अमेरिका को हैरत में डाल दिया है। अब तेहरान बिना किसी पूर्व चेतावनी के बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है।
इजरायल और अमेरिका के ‘अंतिम फैसले’ का इंतजार संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत का दावा है कि अमेरिका और इजरायल की बमबारी में अब तक 1300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि युद्ध कब थमेगा, इसका फैसला वह और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मिलकर लेंगे। ट्रंप का तर्क है कि यदि वे मिलकर कार्रवाई नहीं करते, तो ईरान इजरायल का नामोनिशान मिटा देता। फिलहाल, वॉशिंगटन से मिल रहे संकेत बता रहे हैं कि यह भीषण जंग अभी कई हफ्तों तक खिंच सकती है, जिससे पूरी दुनिया पर मंदी और मानवीय संकट का खतरा मंडरा रहा है।
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