Washington, (USA): स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले दो महीनों से जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ ‘सीधी जंग’ के बजाय ‘आर्थिक नाकेबंदी’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने अधिकारियों को होर्मुज में ‘लॉन्ग-टर्म सीज’ यानी लंबी घेराबंदी के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका की इस रणनीति का मकसद ईरान की लाइफलाइन कहे जाने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह ठप कर उसे आर्थिक रूप से पंगु बनाना है।

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तेल के बोझ तले दबा ईरान— अमेरिका की इस नाकेबंदी का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। निर्यात रुकने के कारण ईरान के पास कच्चे तेल का भारी भंडार जमा हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान के पास अब केवल 12 से 22 दिन का ही तेल स्टोरेज बचा है। यदि यह नाकेबंदी जारी रही, तो ईरान को मजबूरन अपना उत्पादन बंद करना पड़ेगा, जिससे उसकी सरकारी आमदनी शून्य हो जाएगी। स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान अब अपने पुराने और कबाड़ हो चुके टैंकरों में भी तेल भरने को मजबूर है।

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ईरान का शांति प्रस्ताव और ट्रंप की सख्ती— गंभीर आर्थिक संकट को देखते हुए ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी हटाता है, तो वह अस्थायी युद्ध विराम पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस बार ‘आर-पार’ के मूड में दिख रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सीधे युद्ध में होने वाले नुकसान से बचने के लिए आर्थिक दबाव बनाना एक संतुलित और सटीक तरीका है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान इस भारी दबाव के आगे झुककर परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मेज पर आएगा या खाड़ी में तनाव और बढ़ेगा।

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