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Health Desk: क्या आपने कभी गौर किया है कि सुबह उठते ही आपकी जीभ पर सफेद या पीली परत जमी होती है? आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई साधारण गंदगी नहीं बल्कि शरीर में बढ़ते ‘आम’ का संकेत है। जीभ हमारे अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना होती है और इस पर जमी परत बताती है कि आपका शरीर विषैले पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर नहीं निकाल पा रहा है।
क्या होता है ‘आम’ और यह क्यों है खतरनाक?
जब शरीर का मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है और भोजन सही से पच नहीं पाता, तो पेट में सड़न पैदा होने लगती है। इसी स्थिति को आयुर्वेद में ‘आम’ कहा जाता है। यह गंदगी न केवल कब्ज, गैस और एसिडिटी पैदा करती है, बल्कि खून में मिलकर गठिया, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी खतरनाक बीमारियों की वजह भी बनती है।
आयुर्वेद के 3 रामबाण उपाय
अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो आयुर्वेद में इसे नियंत्रित करने के तीन प्रभावी तरीके बताए गए हैं:
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इंटरमिटेंट फास्टिंग: रोजाना 14 से 16 घंटे का अंतराल रखने से शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिलता है। शाम 7 बजे तक भोजन कर लेना और अगले दिन 10-11 बजे नाश्ता करना सबसे उपयुक्त है। इससे शरीर को खुद की सफाई करने का मौका मिलता है।
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जीरा-धनिया-सौंफ का काढ़ा: इन तीनों को बराबर मात्रा में पानी में उबालें और दिनभर घूंट-घूंट कर पिएं। यह काढ़ा शरीर के अंदरूनी ब्लॉकेज को खत्म करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है।
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अग्निसार क्रिया: योग की यह क्रिया पाचन अग्नि को तेज करती है। खाली पेट पेट को अंदर-बाहर पंप करने से जमा हुआ ‘आम’ धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
इसके अलावा, आयुर्वेद सलाह देता है कि दिनभर हल्का गुनगुना पानी पिएं। ठंडा पानी टॉक्सिन्स को जमा करता है और कब्ज की समस्या को बढ़ा सकता है। अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव करके आप गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।
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