Tirupati (Andhra Pradesh): करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसादम को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सीबीआई (CBI) की चार्जशीट और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के दावों के अनुसार, जिस लड्डू को श्रद्धालु परम पावन मानते हैं, उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घी में बाथरूम साफ करने वाले ‘इंडस्ट्रियल केमिकल्स’ की मिलावट के संकेत मिले हैं। यह मामला अब केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और विश्वास पर सीधा प्रहार बन गया है।

डिटर्जेंट वाला एसिड और खतरनाक केमिकल

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, घी में पशु चर्बी की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन ‘लिनियर अल्काइल बेंजीन सल्फोनिक एसिड’ जैसे पदार्थों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह एक ऐसा नॉन-फूड ग्रेड केमिकल है जिसका इस्तेमाल डिटर्जेंट और सफाई उत्पादों में किया जाता है। मुख्यमंत्री नायडू ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में घी की गुणवत्ता के साथ ऐसा खिलवाड़ हुआ कि उसमें बाथरूम क्लीनर तक के रसायन पहुँच गए।

व्हाट्सएप पर दिए गए थे ऑर्डर?

सत्ताधारी टीडीपी (TDP) ने आरोप लगाया है कि साल 2022 से 2024 के बीच इन रसायनों की आपूर्ति के लिए फर्जी बिलों का सहारा लिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन खतरनाक रसायनों के ऑर्डर कथित तौर पर व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से दिए गए थे। हजारों किलो केमिकल डेयरी कंपनियों के जरिए मंदिर की रसोई तक पहुँचाया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।

राजनीतिक घमासान: जगन बोले- ‘यह सिर्फ राजनीति’

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) का कहना है कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए धर्म का सहारा ले रही है। जगन रेड्डी ने तर्क दिया कि जब रिपोर्ट में पशु वसा (Lard) नहीं मिली है, तो सरकार जानबूझकर जनता को गुमराह कर रही है। विपक्ष अब इस मामले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

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भले ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हों, लेकिन आम श्रद्धालु इस बात से बेहद आहत और चिंतित हैं। अब सभी की निगाहें विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट और आने वाली अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं, ताकि इस ‘महापाप’ का असली सच सामने आ सके।

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