रांची: झारखंड में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। गुरुवार को रांची के नामकुम स्थित IOCL कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में पेट्रोलियम कंपनियों के झारखंड कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रदीप पॉल और पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के प्रमुख राजेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि राज्य में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह नियंत्रण में है।
पेट्रोल-डीजल : 12 दिनों का सुरक्षित स्टॉक
अधिकारियों ने आंकड़ों के साथ बताया कि झारखंड में वर्तमान में 2084 रिटेल आउटलेट और 5 मुख्य डिपो संचालित हैं। राज्य में औसतन हर दिन 1750 किलोलीटर पेट्रोल और 3450 किलोलीटर डीजल की खपत हो रही है। राहत की बात यह है कि हमारे पास अगले 12 दिनों तक का एडवांस स्टॉक उपलब्ध है। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे ‘घबराहट में खरीदारी’ (Panic Buying) न करें, क्योंकि सभी पेट्रोल पंपों पर बिक्री सामान्य रूप से जारी है।
LPG और PNG : डिजिटल क्रांति का असर
एलपीजी वितरण के मामले में झारखंड तेजी से डिजिटल हो रहा है। डॉ. पॉल ने बताया कि:
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डिजिटल बुकिंग: पिछले दो महीनों में गैस की डिजिटल बुकिंग 70% से बढ़कर 95% हो गई है।
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सुरक्षित डिलीवरी: डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का पालन अब 90% मामलों में हो रहा है, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगी है।
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बैकलॉग: राज्य में 67.5 लाख उपभोक्ताओं के लिए 5 बॉटलिंग प्लांट सक्रिय हैं। केवल 5 दिनों का बैकलॉग है, जिसे तेजी से पूरा किया जा रहा है।
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प्राथमिकता: अस्पताल, रेलवे और डिफेंस जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को 70% कमर्शियल आवंटन के साथ प्राथमिकता दी जा रही है।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में पीएनजी (PNG) का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है। पिछले एक महीने में 4000 नए कनेक्शन जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल कनेक्शनों की संख्या 41 हजार पार कर गई है।
अफवाहों पर लगाम और सख्त निगरानी
प्रेस वार्ता में यह भी साफ किया गया कि जिला प्रशासन और तेल कंपनियों के बीच दैनिक समन्वय बैठकें हो रही हैं। प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी केवल उपभोक्ताओं के घरों पर ही की जाए। डॉ. प्रदीप पॉल ने जोर देकर कहा कि आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है, इसलिए नागरिक किसी भी भ्रामक समाचार या अफवाह पर ध्यान न दें।



