रांची: राजधानी के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए रांची पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को SSP के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में यातायात पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक और जिला परिवहन पदाधिकारी सहित निजी स्कूलों के प्रबंधन और अभिभावक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य केंद्र उच्च न्यायालय द्वारा स्कूल बसों के लिए दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना था।
बसों के लिए क्या हैं नए नियम?
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब स्कूल बसों और वैन के लिए मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। प्रमुख दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं:
-
रंग और पहचान: स्कूल की सभी बसों का रंग अनिवार्य रूप से पीला (Yellow) होना चाहिए। बस पर स्पष्ट रूप से ‘SCHOOL BUS’, वैन का नंबर और स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए।
-
तकनीकी सुरक्षा: प्रत्येक वाहन में CCTV कैमरा, GPS ट्रैकिंग सिस्टम, प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid Box) और अग्निशमन यंत्र का होना अनिवार्य है। साथ ही आपातकालीन नंबर भी साफ शब्दों में लिखे होने चाहिए।
-
सीटिंग क्षमता: बच्चों की सुरक्षा के लिए बस या वैन में सीट के अनुपात में ही बच्चे बैठाए जाएंगे। अतिरिक्त बेंच या सीट लगवाकर क्षमता से अधिक बच्चे ले जाने पर सख्त पाबंदी होगी।
ड्राइवर और स्टाफ का होगा ‘पुलिस वेरिफिकेशन’
पुलिस ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिया है कि वे सभी ड्राइवरों और सह-चालकों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य रूप से करवाएं। उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर स्कूल के पास होने के साथ-साथ यातायात पुलिस को भी उपलब्ध कराना होगा, ताकि बड़े स्तर पर अभियान चलाकर उनकी जांच की जा सके।
अभिभावकों से अपील : मानक न पूरे करने वाले वाहनों को कहें ‘ना’
बैठक में पेरेंट्स एसोसिएशन से अनुरोध किया गया कि वे अभिभावकों को जागरूक करें। यदि कोई निजी ऑटो या वैन तय मानकों को पूरा नहीं करता, तो उसमें बच्चों को स्कूल न भेजें। बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि माता-पिता की भी जिम्मेदारी है।
संवाद से बढ़ेगी जागरूकता
आने वाले दिनों में पुलिस अधिकारियों और बच्चों के बीच ‘संवाद श्रृंखला’ शुरू की जाएगी। इसमें साइबर क्राइम, ड्रग्स, यातायात जागरूकता और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर बच्चों को जागरूक किया जाएगा। रांची यातायात पुलिस की इस पहल से उम्मीद है कि स्कूली बच्चों का सफर अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम होगा।



