रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित इस वर्ष की मैट्रिक परीक्षा के परिणामों ने राज्य के शैक्षिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर पेश की है। इस बार बड़े शहरों की तुलना में छोटे और सुदूरवर्ती जिलों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। परीक्षा परिणामों के विश्लेषण में गुमला जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है, जबकि संथाल परगना के दुमका और पाकुड़ जिलों ने क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया है।
गुमला का ‘गोल्डन’ प्रदर्शन
गुमला जिले ने अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 99.32 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है। जिले के लगभग हर छात्र ने सफलता की दहलीज पार की है। वहीं, दुमका 99.02 प्रतिशत के साथ दूसरे और पाकुड़ 98.56 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य के ग्रामीण और जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर और जागरूकता में भारी सुधार हुआ है।
पिछड़ गई राजधानी रांची
हैरानी की बात यह रही कि राज्य की राजधानी और शिक्षा का हब माने जाने वाला रांची जिला टॉप-10 की सूची से भी बाहर हो गया है। रांची को इस सूची में 15वां स्थान मिला है, जहाँ कुल 94.75 प्रतिशत छात्र ही सफल हो पाए हैं।
अन्य जिलों का रिपोर्ट कार्ड
राज्य के अन्य प्रमुख जिलों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा। चौथे स्थान पर पूर्वी सिंहभूम (98.02%) रहा, जबकि लातेहार (96.90%) पांचवें स्थान पर रहा। टॉप परफॉर्मर्स की इस लिस्ट में बोकारो (96.43%), साहेबगंज (96.22%) और पलामू (96.01%) ने भी अपनी जगह बनाई है।
वहीं, सूची के निचले पायदानों की बात करें तो चतरा (91.20%), खूंटी (91.58%) और गढ़वा (91.71%) जैसे जिलों को अपने प्रदर्शन में और सुधार करने की आवश्यकता है। औद्योगिक शहर धनबाद 95.84 प्रतिशत के साथ बीच के पायदानों पर बना रहा। यह परिणाम झारखंड की बदलती शिक्षा व्यवस्था का प्रमाण हैं, जहाँ संसाधनों की कमी के बावजूद गुमला और पाकुड़ जैसे जिलों के छात्रों ने कड़ी मेहनत से सफलता का परचम लहराया है।



