Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के जेसीईआरटी, रातू परिसर में शनिवार को राज्य स्तरीय समृद्धि प्रतियोगिता 2025 का भव्य आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता शिक्षकों की प्रतिभा और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
इस प्रतियोगिता में राज्य के सभी 24 जिलों से चयनित दो-दो शिक्षक शामिल हुए। कुल 48 शिक्षकों ने अपनी-अपनी विषयगत प्रस्तुतियां दीं और यह बताया कि किस तरह कला आधारित शिक्षा पद्धति के माध्यम से कठिन विषयों और सवालों को भी सरल तरीके से छात्रों को समझाया जा सकता है।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक और उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया। प्रतियोगिता के दौरान विज्ञान, गणित, समाजशास्त्र, हिंदी और भूगोल जैसे विषयों पर शिक्षकों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कैसे कला समेकित शिक्षण विधियों से शिक्षा के सभी आयामों को प्रभावी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के प्रशासी पदाधिकारी सच्चिदानंद दिवेंदु तिग्गा, जेसीईआरटी के उपनिदेशक बांके बिहारी सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन ए सोरेंग और समन्वयक समृद्धि चंद्रदेव सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि तिग्गा ने कहा कि शिक्षा में स्थायी विकास तभी संभव है जब शिक्षक अपने अनुभव और प्रतिभा के साथ नए तरीकों को अपनाएं। उन्होंने शिक्षकों को समृद्धि कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि यह प्रयास निश्चित ही शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
विशिष्ट अतिथि बांके बिहारी सिंह ने भी कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि समृद्धि प्रतियोगिता शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी। वहीं, धीरसेन ए सोरेंग ने बताया कि यह कार्यक्रम पिछले वर्ष से शुरू हुआ है और यह कला उत्सव का एक हिस्सा है। उन्होंने यह भी साझा किया कि पिछले वर्ष दो शिक्षक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक पहुंचे थे और उम्मीद जताई कि इस वर्ष भी झारखंड के शिक्षक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।
कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी चंद्रदेव सिंह ने संभाली। निर्णायक मंडली में मोहम्मद सैफुल्लाह आमिर, मणिलाल, मिथिलेश कुमार, चिरंजीत नाथ और मनीषा धवन शामिल थे, जिन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।
समृद्धि प्रतियोगिता ने साबित कर दिया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि कला और सृजनात्मकता को जोड़कर इसे और भी रोचक और जीवन से जुड़ा बनाया जा सकता है।



