Jamshedpur news: टाटा स्टील नेदरलैंड यूरोप की महत्वाकांक्षी शोध परियोजना“सीआईएसएमए” (CiSMA) में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य पूरी तरह स्क्रैप आधारित और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) तकनीक से तैयार उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का विकास करना है, ताकि स्टील उद्योग को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके। यह पहल यूरोप में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

रविवार को परियोजना से जुड़े शोधकर्ता डॉ. राधाकांत राणा ने बताया कि इस संयुक्त प्रयास से प्राप्त तकनीकी ज्ञान और अनुभव भविष्य में ग्रीन स्टील उत्पादन को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील पहले से ही उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण में स्क्रैप के उपयोग को लगातार बढ़ा रही है और यह परियोजना उस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

इस शोध का प्रमुख लक्ष्य 100 प्रतिशत स्क्रैप और ईएएफ तकनीक के माध्यम से शीट स्टील उत्पादन में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को लगभग 70 प्रतिशत तक कम करना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में पूरी तरह स्क्रैप आधारित उत्पादन व्यावहारिक चुनौतियों से जुड़ा है, क्योंकि यह स्क्रैप की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसके बावजूद परियोजना के जरिए 30 से 40 प्रतिशत स्क्रैप मिश्रित उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण की संभावनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

परियोजना में मशीन लर्निंग और डिजिटल मॉडलिंग तकनीक का उपयोग कर दूषित स्क्रैप को शुद्ध करने पर भी शोध किया जा रहा है। इससे कॉपर जैसे महत्वपूर्ण धातुओं को दोबारा प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

सीआईएसएमए परियोजना में ऑटोमोबाइल और घरेलू उपकरण उद्योग की बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। वॉल्वो कार्स और इलेक्ट्रोलक्स प्रोफेशनल इस रिसायकल स्टील के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर रही हैं। परियोजना का कुल बजट लगभग 4.5 मिलियन यूरो है, जिसे यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम के तहत वित्तपोषित किया जा रहा है।

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