Ranchi News : झारखंड में आदिवासी समाज के हितों की रक्षा, उनकी संस्कृति के संरक्षण और समग्र विकास को लेकर राज्य सरकार निरंतर सक्रिय है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को झारखंड मंत्रालय के सभागार में झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (TAC) की बैठक संपन्न हुई। बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर सहमति प्रदान की गई।

बैठक में कई नीतिगत प्रस्तावों पर निर्णय लेते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि राज्य के आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिले। इस महत्वपूर्ण बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री-सह-टीएसी उपाध्यक्ष चमरा लिंडा, विधायक-सह-टीएसी सदस्य प्रो. स्टीफन मरांडी, लुईस मरांडी, सोनाराम सिंकू, दशरथ गागराई, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोनगाड़ी, जिगा सुसारन होरो, संजीव सरदार, आलोक कुमार सोरेन, सुदीप गुड़िया, जगत मांझी, राम सूर्या मुंडा, रामचंद्र सिंह सहित मनोनीत सदस्य नारायण उराँव एवं जोसाई मार्डी भी उपस्थित रहे।

पर्यटन क्षेत्र में मदिरा बिक्री की नई नीति पर सहमति

बैठक में झारखंड उत्पाद नियमावली 2025 के तहत मदिरा की खुदरा बिक्री से संबंधित प्रस्ताव पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। परिषद ने सहमति व्यक्त की कि राज्य के ऐसे आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत जहां 50% या उससे अधिक जनजातीय आबादी निवास करती है और जिन्हें पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय या स्थानीय महत्व का पर्यटन स्थल घोषित किया गया है (धार्मिक स्थलों को छोड़कर), वहां पर्यटन को बढ़ावा देने, राजस्व सृजन करने और अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण हेतु खुदरा उत्पाद दुकानों को संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।

होटल, रेस्टोरेंट व क्लब में मदिरा अनुज्ञप्ति पर संशोधन

इसी क्रम में झारखंड उत्पाद होटल, रेस्टोरां, बार एवं क्लब अनुज्ञापन एवं संचालन नियमावली 2025 के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। प्रस्ताव के अनुसार उपरोक्त घोषित पर्यटन स्थलों पर होटल, बार और रेस्टोरेंट को अनुज्ञप्ति देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, जिससे पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिले और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित हों।

ईचा डैम परियोजना पर पुनर्विचार

सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के अंतर्गत पश्चिमी सिंहभूम जिले के खरकई नदी पर प्रस्तावित ईचा बाँध के निर्माण कार्य को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। परिषद ने निर्णय लिया कि इस परियोजना से प्रभावित गांवों की वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन, फोटो, वीडियो दस्तावेज के साथ किया जाएगा और एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि विस्थापित होने वाले आदिवासी परिवारों के हितों की रक्षा की जा सके।

“अबुआ बीर दिशोम” अभियान रहेगा निरंतर जारी

वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शुरू किए गए “अबुआ बीर दिशोम” अभियान को परिषद द्वारा स्थायी रूप से लागू रखने का निर्णय लिया गया है। यह भी सुनिश्चित किया गया कि हर दो महीने में नियमित रूप से वन अधिकार पत्र (Forest Rights Patta) का वितरण किया जाए। आवेदन की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा।

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 पर स्पष्टता

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 के अंतर्गत “थाना क्षेत्र” की परिभाषा को लेकर उत्पन्न अस्पष्टता को दूर करने हेतु परिषद ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया गया कि 1938 में निर्धारित थाना क्षेत्र के आधार पर नियमावली तैयार की जाए। इसके लिए एक विशेष आयोग का गठन भी किया जाएगा, जो छह महीने के भीतर अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगा।

लगुबुरु में डीवीसी की परियोजना पर चर्चा

बोकारो जिले के ललपनिया स्थित आदिवासी धार्मिक स्थल लगुबुरु में डीवीसी (DVC) द्वारा प्रस्तावित जल विद्युत परियोजना पर भी बैठक में चर्चा हुई। परिषद को सूचित किया गया कि राज्य सरकार ने पहले ही डीवीसी को परियोजना स्थगित करने का निर्देश दिया है और भारत सरकार को भी इस निर्णय से अवगत करा दिया गया है ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनी रहे।

वनपट्टा धारकों के बच्चों को प्रमाण पत्र निर्गत में सुविधा

परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि वनपट्टा प्राप्त परिवारों के बच्चों को जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में उत्पन्न अड़चनों का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें ताकि बच्चों की शिक्षा और विकास में बाधा नहीं आए।

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