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रांची: झारखंड के बहुचर्चित ‘टेंडर कमीशन घोटाले’ में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। मामले के आरोपी और तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (सेवानिवृत्त) राजकुमार टोप्पो ने गुरुवार को रांची स्थित विशेष PMLA कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के बाद अदालत ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। हालांकि, यह जमानत सख्त शर्तों के साथ मिली है।
पासपोर्ट जमा और देश छोड़ने पर पाबंदी
अदालत ने राजकुमार टोप्पो को निर्देश दिया है कि उन्हें सुनवाई की हर तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। साथ ही, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो और आरोपी फरार न हो सके, इसके लिए अदालत ने उनका पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। बिना कोर्ट की अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
ED की चार्जशीट और बढ़ता घेरा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस घोटाले की तह तक जाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। हाल ही में ईडी ने राजकुमार टोप्पो सहित 14 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में पूरक प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट (Supplementary Charge-sheet) दाखिल की थी। कोर्ट द्वारा समन जारी किए जाने के बाद अब तक 6 से अधिक आरोपी सरेंडर कर चुके हैं। राजकुमार टोप्पो पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए टेंडर आवंटन में कमीशनखोरी के खेल में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
करोड़ों का कैश और पूर्व मंत्री का कनेक्शन
इस घोटाले की गूँज साल 2023 से सुनाई दे रही है, लेकिन 6 मई 2024 को हुई छापेमारी ने पूरे देश को चौंका दिया था। ईडी ने जब पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पीएस (संजीव लाल) के घरेलू सहायक (नौकर) के ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां से 32 करोड़ रुपये से अधिक की नगदी बरामद हुई थी।
इतना ही नहीं, जांच की आंच ठेकेदारों तक भी पहुंची। छापेमारी के दौरान ठेकेदार मुन्ना सिंह के पास से 2.93 करोड़ और राजीव सिंह के ठिकाने से 2.14 करोड़ रुपये जब्त किए गए थे। इतनी बड़ी रकम की बरामदगी के बाद ही तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम ईडी के रडार पर आए और इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ।
फिलहाल, राजकुमार टोप्पो की जमानत के बाद अब जांच एजेंसी अन्य फरार और नामजद आरोपियों पर दबाव बना रही है। झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस केस ने हड़कंप मचा रखा है।

