Ranchi : सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर आज सुनाए गए अंतरिम फैसले पर आमया संगठन ने बैठक कर प्रतिक्रिया दी। संगठन के अध्यक्ष एस. अली ने कोर्ट के फैसले को तत्काल राहत बताते हुए कहा कि यह फैसला वक्फ से जुड़े कई विवादित पहलुओं को स्पष्ट करता है, लेकिन अंतिम न्याय संवैधानिक पीठ की सुनवाई के बाद ही संभव होगा।

एस. अली ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बाय यूजर के तहत स्थापित संपत्तियों के मामलों में जिला कलेक्टर के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही, वक्फ करने के लिए व्यक्ति को कम से कम पांच वर्ष तक इस्लाम धर्म का पालन करने की शर्त को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्रीय वक्फ परिषद में 4 और राज्य वक्फ बोर्ड में 3 सदस्यों को बनाए रखने तथा बोर्ड का सीईओ मुस्लिम ही हो , इस शर्त को भी बरकरार रखा है। हालांकि, अन्य संशोधन यथावत रखे गए हैं। संगठन ने यह भी मांग की कि वक्फ एक्ट जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में की जाए, ताकि समुचित न्याय मिल सके।

इसी बैठक में हटिया विधायक नवीन जयसवाल द्वारा पुंदाग के इलाही नगर में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठिया कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। संगठन ने इसे धार्मिक विद्वेष फैलाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बताया। आमया संगठन ने राज्य निर्वाचन आयोग और विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि विधायक के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया जाए और उनकी सदस्यता रद्द की जाए।

एस. अली ने यह भी कहा कि झारखंड हाईकोर्ट में घुसपैठ के मामले में केंद्र सरकार द्वारा कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया, न ही जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई तथ्य सामने आया है। इसके बावजूद, झारखंडी मुसलमानों को बार-बार घुसपैठिया कहना उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ है।

बैठक के दौरान आमया संगठन की जिला समिति के विस्तार के लिए 8 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय पदाधिकारी जियाउद्दीन अंसारी, मो. फुरकान, नौशाद आलम, कलाम आजाद, मो. मौनव्वर, गफ्फार अंसारी समेत कई सदस्य उपस्थित रहे।

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