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Lucknow: अदब के शहर लखनऊ में आज सद्गुरु रितेश्वर महाराज के तेवर काफी सख्त नजर आए। दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हुई नारेबाजी को लेकर उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि इस मुल्क में संविधान से ऊपर कोई नहीं है- न कोई छात्र, न कोई आश्रम और न ही कोई रसूखदार।
“आश्रम हो या यूनिवर्सिटी, कानून सबके लिए बराबर”
मीडिया से रूबरू होते हुए महाराज जी ने दो टूक कहा कि अगर उनके ‘श्रीआनंदम आश्रम’ में भी कोई असंवैधानिक काम होगा, तो वह खुद को गुरु बताकर बच नहीं सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी व्यक्ति संविधान की लक्ष्मण रेखा लांघेगा, उसे कानून के हंटर का सामना करना ही पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक नियमों का पालन करना हर नागरिक की पहली जिम्मेदारी है।
हिंदू राष्ट्र नहीं, यह तो स्वभाव से ही ‘सनातन राष्ट्र’ है
हिंदू राष्ट्र की बहस पर अपनी बात रखते हुए रितेश्वर महाराज ने कहा कि इसे अलग से घोषित करने की जरूरत ही क्या है? हमारे ऋषि-मुनियों ने तो इसे सदियों पहले ही सनातन परंपराओं की भूमि बता दिया था। 140 करोड़ की आबादी आज भी सनातन मूल्यों से पोषित हो रही है, जो हमारे आचरण और पूजा-पाठ में रची-बसी है।
अब होगी ‘राष्ट्र कथा’, मैकाले की शिक्षा नीति पर बरसे महाराज
महाराज जी ने एक नई मुहिम ‘राष्ट्र कथा’ का ऐलान करते हुए कहा कि जब देश सुरक्षित रहेगा, तभी धर्म बचेगा। उन्होंने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसी ने हमारे भीतर हीनभावना भरी है। उन्होंने पीएम मोदी के विजन की तारीफ करते हुए कहा कि अगले दस सालों में इस पुरानी नीति को उखाड़ फेंका जाएगा। ‘राष्ट्र कथा’ के जरिए उन युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ा जाएगा, जो पश्चिमी चकाचौंध में अपनी संस्कृति भूल चुके हैं।



