Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची स्थित जमीअतुल मोमिनीन चौरासी के प्रतिनिधिमंडल ने आज झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के कार्यालय में एक मांग पत्र सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अध्यक्ष मो. मजीद अंसारी कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में वक्फ संख्या 1701, यानी अंजुमन इस्लामिया रांची, की नियमावली के पृष्ठ संख्या 5 में दर्ज “मोजाफात (आसपास के क्षेत्र)” को स्पष्ट रूप से वर्तमान वार्ड और पंचायतों के अनुसार परिभाषित करने की मांग की। 

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि जब तक मोजाफात क्षेत्र का स्पष्ट नामकरण नहीं किया जाएगा, तब तक अंजुमन इस्लामिया रांची के चुनाव-2025 की घोषणा को स्थगित रखा जाए। उनका मानना है कि अस्पष्ट क्षेत्रीय सीमाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को बाधित करती हैं और इससे कई योग्य मुस्लिम संगठन चुनावी भागीदारी से वंचित रह जाते हैं।

इस मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 1978 में बनी नियमावली के पृष्ठ संख्या 5 में दर्ज है कि अंजुमन इस्लामिया रांची का कार्यक्षेत्र रांची और डोरंडा नगर निगम, धुर्वा, हटिया, कांके, बरियातू, न्यासराय और इनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित है। लेकिन वर्तमान में रांची शहरी सीमा काफी आगे तक फैल चुकी है। सरकार द्वारा चुनावी क्षेत्रों को वार्डों और पंचायतों में विभाजित कर दिया गया है, लेकिन अंजुमन की नियमावली में इन नए नामों और सीमाओं का कोई उल्लेख नहीं है।

समस्या तब उत्पन्न होती है जब चुनाव के दौरान रांची शहर से सटे कई मुस्लिम तंजीम, मस्जिद कमिटियां, मदरसे और कब्रिस्तान समितियों के सदस्य बनने के आवेदन यह कहकर खारिज कर दिए जाते हैं कि वे संगठन कार्यक्षेत्र से बाहर हैं, जबकि इनकी दूरी रांची शहर से केवल 10 से 15 किलोमीटर होती है।

विरोधाभास यह है कि पिछले दो चुनावों में कुछ ऐसे क्षेत्र जो 25 किलोमीटर दूर थे, वहां के संगठनों को सदस्यता प्रदान की गई थी। यह द्वैध नीति न केवल भ्रम पैदा करती है, बल्कि इससे समाज में नाराजगी, असमानता और भेदभाव की भावना भी उत्पन्न होती है।

प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि अंजुमन इस्लामिया रांची वक्फ संख्या-1701 की नियमावली में संशोधन कर उसमें वर्तमान चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित वार्डों और पंचायतों के नामों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि रांची से सटे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मुस्लिम संगठनों को सदस्यता से वंचित न किया जाए।

यह मामला न केवल संगठनात्मक न्याय का है, बल्कि यह समाजिक समावेश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। एक अद्यतन नियमावली जहां अंजुमन की पहुंच और प्रभाव को मजबूत करेगी, वहीं समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने का उदाहरण भी बनेगी।

समाज के कई बुद्धिजीवियों, संगठनों और मौलवियों ने इस मांग का समर्थन करते हुए अपील की है कि संबंधित प्राधिकरण शीघ्र इसपर ध्यान दे और नियमावली में जरूरी बदलाव करे, जिससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और सर्वसमावेशी बन सके। प्रतिनिधिमंडल ने कहा यदि अंजुमन इस्लामिया का कार्यक्षेत्र स्पष्ट कर दिया जाता है, तो आने वाले चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी हो सकेंगे। 

इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे-सचिव नूर आलम, प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी जुनेद आलम, कोषाध्यक्ष अरशद जिया, इसराइल अंसारी, इसरार क्रांति, ज़ायउद्दीन अंसारी, हारीश अंसारी, अलाउद्दीन अंसारी, मोहम्मद तल्हा, सफदर सुल्तान, तब्बारक अंसारी, ताजुद्दीन अंसारी और सज्जाद अंसारी।

Share.
Exit mobile version