India News: मनरेगा की जगह नया कानून लाने के बाद अब केंद्र सरकार का फोकस यूपीए सरकार के दौर में बने दो बड़े सामाजिक अधिकार कानूनों पर आ गया है। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव को लेकर सरकार गंभीरता से मंथन कर रही है। सरकार का मानना है कि किसी योजना को केवल कानूनी अधिकार बना देना काफी नहीं, बल्कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंचना ज्यादा जरूरी है।
केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में इन दोनों कानूनों के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव किए जाएंगे। अगर इससे अपेक्षित सुधार नहीं दिखा, तो संसद में संशोधन या नया विधेयक लाने का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि भविष्य में आवास के अधिकार को भी कानूनी दर्जा दिया जाए।
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परामर्श प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यूपीए सरकार के समय बने विकास से जुड़े अधिकार कानूनों में कुछ बुनियादी खामियां सामने आई हैं। पहली बड़ी समस्या यह है कि शिक्षा का अधिकार कानून होने के बावजूद हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं पहुंच सकी। दूसरी, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कई पात्र परिवार आज भी लाभ से वंचित हैं। तीसरी और अहम कमी लाभार्थियों की पहचान और पंजीकरण की प्रक्रिया में रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी योजनाओं में 100 प्रतिशत लाभार्थी पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की मंशा है कि योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सही व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के तहत संसद के शीतकालीन सत्र में मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कानून पारित किया गया, जिसे दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
अब सरकार शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास—इन पांच क्षेत्रों को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत योजनाओं की पूरी कवरेज के लिए समय-सीमा तय करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से रियल-टाइम मॉनिटरिंग और देशव्यापी पंजीकरण अभियान पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि मनरेगा की जगह नया कानून लाने को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया था। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक भी है। इसके बावजूद सरकार अपने एजेंडे पर आगे बढ़ती दिख रही है और अब शिक्षा व खाद्य सुरक्षा कानूनों में बदलाव की दिशा में कदम तेज हो गए हैं।



