रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंधमारी और पेपर लीक के काले खेल में गिरफ्तार हुए 168 आरोपितों के लिए शुक्रवार का दिन राहत भरा रहा। राजधानी रांची के अपर न्यायायुक्त योगेश की अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपितों को जमानत दे दी है। अदालत ने प्रत्येक आरोपित को 20-20 हजार रुपये के दो निजी मुचलके भरने का निर्देश दिया है। इससे पहले बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आधी रात को अर्धनिर्मित भवन में छापेमारी

यह पूरा मामला इसी साल 11 अप्रैल का है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव में एक सुनसान अर्धनिर्मित भवन में संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। जब विशेष छापेमारी दल ने देर रात वहां धावा बोला, तो पुलिस भी दंग रह गई। वहां भारी संख्या में लोग जमा थे, जो पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश करने लगे। घेराबंदी कर पुलिस ने मौके से 168 लोगों को दबोचा, जिनमें अधिकांश परीक्षार्थी थे।

10 लाख में नौकरी का सौदा और ‘रटंत विद्या’

जांच में जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। पुलिस के अनुसार, अंतरराज्यीय पेपर लीक गिरोह के एजेंटों ने अभ्यर्थियों को इस गुप्त स्थान पर ठहराया था। गिरोह के सरगना अभ्यर्थियों को मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड जब्त कर उन्हें परीक्षा में आने वाले सवालों के उत्तर रटवा रहे थे

गिरोह ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 10-10 लाख रुपये का सौदा किया था। सुरक्षा के तौर पर गिरोह ने कई अभ्यर्थियों से ब्लैंक चेक भी ले रखे थे।

गिरोह के सरगना भी थे पुलिस के रडार पर

गिरफ्तार किए गए लोगों में केवल परीक्षार्थी ही नहीं, बल्कि इस रैकेट को चलाने वाले पांच मुख्य सरगना भी शामिल थे। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद को भी दबोचा था। इसके अलावा गिरफ्तार होने वालों में सात महिला आरोपित भी शामिल थीं।

तमाड़ थाना में दर्ज कांड संख्या 21/2026 के तहत 152 पुरुष अभ्यर्थियों और अन्य पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 13 अप्रैल से सभी आरोपित न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे। हालांकि अब जमानत मिलने से उन्हें जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।

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