Ranchi News : रांची जिले के कई प्रखंड कार्यालयों में आम लोगों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। स्पष्ट रूप से कहें तो इन प्रखंड कार्यालयों में मूल सुविधाओं का घोर अभाव है। जैेसे बैठने के लिए कुर्सियां, पेयजल, शौचालय, मार्गदर्शन काउंटर आदि।
प्रखंड कार्यालयों में आने पर लोगों को या तो घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है या अधिकारियों के इंतजार में कार्यालय में इधर-उधर भटकना पड़ता है क्योंकि उनके बैठने के लिए परिसर में कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं है। इन आम लोगों में एक बड़ी संख्या बुजुर्गों एवं महिलाओं की है। उन्हें भी इस कुव्यवस्था का कोपभाजन बनना पड़ता है। थक हारकर वे परिसर की सीढि.योंं एवं उसके रेलिंग को अपना सहारा बनाकर अपने कार्य करवाने के लिए इंतजार करते हुए देखे जाते हैं। कुछ प्रखंड कार्यालय में कुर्सियां हैं भी तो उनके पैर टूटे हुए हैं और वह बैठने लायक नहीं हैं।
अधिकारी व्यवहार में असंवेदनशील
जिन्हें निर्देशित सेवाएं देने का कार्य प्रखंड स्तरीय अधिकारी करते हैं, वे स्वयं ही लोकहित से दूर प्रतीत होते हैं। न केवल वरिष्ठ अधिकारी, बल्कि निचले स्तर के कर्मचारी भी आवश्यक मार्गदर्शन देने में विफल रहते हैं। इसके कारण कार्यालय में आने वाले लोग भटकना और झुंझलाहट महसूस करते हैं। लोगों को पीने के लिए पेयजल तक की व्यवस्था इन अंचल कार्यालयों में नहीं है। लोगों को पेयजल के लिए आसपास के होटलों एवं ठेलों में जाने की मजबूरी है।
शौचालय रहता है बंद
प्रखंड कार्यालयों में मौजूद शौचालय सुविधा भी आम लोगों के लिए नहीं है। शौचालय में ताले लगे रहते हैं, जिनमें कर्मी अपनी सुविधानुसार ही खोलते‑बंद करते हैं। लोग शौचालय के अभाव में स्वयं को उपेक्षित महसुस करते हैं। कई महिलाएं तो शौचालय के आभाव में प्रखंड सह अंचल कार्यालय नहीं आतीं और जिन्हें आने की मजबूरी है, वे शौच के लिए कार्यालय के आस-पास के घर एवं सुनसान स्थानाें का सहारा लेती हैं।
उपायुक्त की जनता के प्रति समर्पण भावना
इन सब व्यवस्थाओं के बावजूद, रांची उपायुक्त–सह–जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री, जनता के प्रति जागरूक और समर्पित हैं। वे प्रत्येक सोमवार रुब‑रु जनता दरबार लगाते हैं, जिसमें ग्रामीण एवं शहरी जनता के विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाता है। साथ ही, उन्होंने प्रत्येक मंगलवार को प्रखंड कार्यालयों में जनता दरबार लगाकर समस्याओं का त्वरित निवारण का निर्देश भी विभागीय पदाधिकारियों को दिया है। बावजूद जनता के प्रति उनके समर्पण की भावना का लाभ अंचल कार्यालय से लोगों को समय पर नहीं मिल पा रहा है।
जनता की अपेक्षा और अधिकारी का व्यवहार
इधर, प्रखंड कार्यालय में जनता दरबार से शिकायतों की सुनवाई तो हो रही है, लेकिन प्रखंड एवं अंचल स्तर पर तैनात अधिकारी तथा कर्मी शिकायतों के प्रति उदासीन बने हुए हैं। कार्यालयों में व्यवहार की संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती। आम लोग अभी भी अपनी समस्याओं व शिकायतों के लिए भटक रहे हैं। लोगों का कहना है कि उपायुक्त महोदय के जनता दरबार में शिकायतों का निवारण शीघ्र होता है जबकि अंचल कार्यालय में शिकायतों को घुमा फिराकर लटकाया जा रहा है। यही कारण है कि उपायुक्त के जनता दरबार में भीड़ बढ़ती जा रही है जबकि अंचल कार्यालयों में लगने वाले जनता दरबार में लोगाें का जमावड़ा काफी कम देखने को मिलता है।
कुछ प्रमुख प्रखंडों की स्थिति
नामकुम, कांके, रातू, ओरमांझी, हेहल जैसे बड़े अंचल व प्रखंड कार्यालयों में व्यवस्था त्रुटिपूर्ण है। इन कार्यालयों में बैठने की व्यवस्था गायब है, शौचालय बंद रहता है और कर्मी मामूली जानकारी या मार्गदर्शन देने में विफल रहते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए जनता में प्रखंड सह अंचल कार्यालयों के प्रति रोष पनप रहा है। लोग दूरी तय कर प्रशासनिक कदम उठाने से हतोत्साहित दिखते हैं।
मैंने कई अंचल कार्यालय का चक्कर लगाया है। कहीं भी लोगों को बैठने एवं शौचालय की सुविधा नहीं है। कई अंंचल कार्यालय में तो पेयजल भी अनुपलब्ध है। शिकायत करने पर कर्मी अपने कार्यालय कक्ष में ले जाकर पानी उपलब्ध कराते हैं। दूर-दराज से आने वाले कितने ग्रामीणों को ये कर्मी कार्यालय कक्ष में बैठाकर पानी पिलाते होंगे? एक ओर उपायुक्त महोदय चीजों को सुधारने में लगे हैं और दूसरी ओर अंचल कर्मी व्यवस्था बिगाड़ने में जरा भी समय नहीं गवाते। अपने कार्यों के प्रति तो अंचल अधिकारी और कर्मी काफी उदासीन हैं। ऐसे व्यवस्था नहीं बदलेगी। उनको जिम्मेवार बनना होगा जैसे हमारे उपायुक्त महोदय हैं।



