Ranchi : पैगम्बर मोहम्मद ﷺ का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा है। उन्होंने ऐसे समय में महिलाओं को सम्मान, अधिकार और सुरक्षा प्रदान की, जब समाज में उनके साथ अत्यधिक अन्याय और असमानता की जाती थी। आपने स्पष्ट रूप से कहा कि ज्ञान प्राप्त करना हर स्त्री और पुरुष पर अनिवार्य है। यह शिक्षा आज भी महिला सशक्तिकरण की सबसे सशक्त नींव है।
महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर भी उन्होंने गहरी संवेदनशीलता दिखाई। इस्लामी परंपराओं में स्वच्छता, पोषण और मातृत्व देखभाल पर दिया गया जोर इसी सोच का परिणाम है। पैगम्बर ﷺ ने महिलाओं को उचित खानपान, साफ-सफाई और नियमित देखभाल को जीवन का आवश्यक हिस्सा बताया। उन्होंने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के अधिकारों को विशेष महत्व दिया तथा परिवार और समाज को उनके सहयोग की जिम्मेदारी सौंपी।
जब बेटियां समाज में हेय दृष्टि से देखी जाती थीं, उनके जन्म पर उत्सव नहीं शोक जताया जाता था, उनके जन्म के बाद उन्हें बालू में दफना दिया जाता था। ऐसी विपरीत सामाजिक परिस्थितियों में पैगम्बर मोहम्मद ﷺ ने बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि रहमत कहा और उनके साथ भेदभाव करने की कड़ी निंदा की। उन्होंने महिलाओं को संपत्ति का अधिकार, विरासत का हिस्सा और स्वतंत्र निर्णय लेने का हक प्रदान किया। यह सब उनके दूरदर्शी नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण का प्रमाण है।
आज जब महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की बातें वैश्विक मंचों पर होती हैं, तब पैगम्बर मोहम्मद ﷺ की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक प्रतीत होती हैं। उनकी बताई राह पर चलकर ही हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं, जहाँ महिला और पुरुष समान अधिकारों और सम्मान के साथ स्वस्थ जीवन जी सकें।
डॉ समरीना कमाल की कलम से
असोसिएट प्रोफेसर सह स्त्री रोग विशेषज्ञ
सदर अस्पताल, रांची।



