Close Menu
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Facebook X (Twitter) Instagram
Public AddaPublic Adda

  • Home
  • India
  • World
  • States
    • Jharkhand
    • Bihar
    • Uttar Pradesh
  • Politics
  • Sports
  • Social/Interesting
  • More Adda
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Home»#Trending»‘डिजिटल दहशत’ के आगे बेबस पुलिस : धमकी दर धमकी, पर गिरफ्त से बाहर हैं मास्टरमाइंड
#Trending

‘डिजिटल दहशत’ के आगे बेबस पुलिस : धमकी दर धमकी, पर गिरफ्त से बाहर हैं मास्टरमाइंड

ई-मेल पर 'आरडीएक्स' और 'सायनाइड' का खौफ: क्या सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह गई है रांची पुलिस की जांच?
Muzaffar HussainBy Muzaffar HussainMarch 6, 20264 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp Threads Telegram
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Telegram WhatsApp Threads Copy Link

अपनी भाषा चुनेें :

बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...

रांची: झारखंड की राजधानी इन दिनों एक अदृश्य और खतरनाक ‘डिजिटल युद्ध’ का सामना कर रही है। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकियाँ अब एक ‘नया सामान्य’ (न्यू नॉर्मल) बनती जा रही हैं। ताजा शिकार बना है रातू रोड स्थित ग्लैक्सिया मॉल का क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय। शुक्रवार को एक अज्ञात ई-मेल ने न केवल मॉल में अफरा-तफरी मचा दी, बल्कि एक बार फिर पुलिस प्रशासन की तकनीकी अक्षमता और सुस्त कार्यप्रणाली को भी बेनकाब कर दिया।

जांच के नाम पर सिर्फ ‘सर्च ऑपरेशन’ की रस्म अदायगी?

ग्लैक्सिया मॉल में जैसे ही बम की खबर फैली, पुलिस की भारी फौज और बम निरोधक दस्ता (BDS) मौके पर पहुँच गया। घंटों तक मॉल के चप्पे-चप्पे की खाक छानी गई, खोजी कुत्तों को दौड़ाया गया, लेकिन अंत में परिणाम वही निकला—‘शून्य’। पुलिस ने इसे ‘हॉक्स’ (झूठी धमकी) बताकर राहत की सांस तो ले ली, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिस का काम सिर्फ बम ढूंढने तक सीमित है? असली अपराधी, जो सात समंदर पार या शायद शहर के ही किसी कोने में बैठकर एक क्लिक से पूरी राजधानी को डरा रहा है, वह अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है?

नाकामी का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’: कोर्ट से कलेक्ट्रेट तक पुलिस फेल

यह पहली बार नहीं है जब रांची पुलिस को इस तरह चुनौती दी गई हो। पिछले कुछ समय का रिकॉर्ड देखें तो पुलिस की ‘तकनीकी विफलता’ साफ नजर आती है:

  • रांची सिविल कोर्ट: कोर्ट परिसर को उड़ाने की धमकी मिली, भारी सुरक्षा बल तैनात हुआ, लेकिन मेल भेजने वाला कौन था? पुलिस आज तक नहीं बता पाई।

  • समाहरणालय (कलेक्ट्रेट): जिला प्रशासन के सबसे बड़े केंद्र को आरडीएक्स से उड़ाने की चेतावनी मिली। यहाँ भी पुलिस की जांच ‘तकनीकी जटिलता’ के नाम पर फाइलों में दब गई।

  • पासपोर्ट कार्यालय: अब ग्लैक्सिया मॉल में हुए इस ड्रामे ने साबित कर दिया है कि शरारती तत्वों के मन में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है।

तकनीकी पिछड़ापन या इच्छाशक्ति की कमी?

हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर हम ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक अदद ई-मेल भेजने वाले का पता लगाने में हमारी साइबर सेल महीनों लगा देती है। अपराधी अक्सर वीपीएन (VPN) या प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (जैसे इंटरपोल या वैश्विक टेक कंपनियों के साथ तालमेल) के जरिए इन्हें ट्रैक करना नामुमकिन है? अब तक की जाँच से तो यही लगता है कि रांची पुलिस पारंपरिक लाठी-डंडा वाली पुलिसिंग से बाहर नहीं निकल पाई है।

रांची पुलिस को ‘एक्सपर्ट सलाह’: कैसे रुकेंगे ये हॉक्स कॉल्स?

सिर्फ मॉल की तलाशी लेने से अपराध नहीं रुकेगा। पुलिस को अपनी रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव की जरूरत है:

डेडिकेटेड ‘थ्रेट असेसमेंट यूनिट’: साइबर सेल में एक ऐसी विशेष टीम होनी चाहिए जो डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड मेल्स को ट्रैक करने में माहिर हो।

अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों से सीधा संवाद: गूगल, प्रोटॉन मेल या अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ राज्य स्तर पर एक त्वरित संचार तंत्र (Real-time Coordination) विकसित करना होगा ताकि आईपी एड्रेस का तत्काल पता चल सके।

कड़ी सजा का उदाहरण: जब तक एक भी ‘फेक मेल’ भेजने वाले को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा और उसे भारी जुर्माने के साथ सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे शरारती तत्वों का मनोबल बढ़ता रहेगा।

पब्लिक अवेयरनेस और रिवॉर्ड: जो व्यक्ति ऐसे डिजिटल अपराधियों की पहचान करने में मदद करे, उसे उचित इनाम और सुरक्षा दी जानी चाहिए।

राजधानी की सुरक्षा महज एक ‘रूटीन चेक’ नहीं होनी चाहिए। अगर पुलिस इसी तरह हर बार ‘कुछ नहीं मिला’ कहकर पल्ला झाड़ती रही, तो किसी दिन कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अब समय आ गया है कि रांची पुलिस अपनी तकनीकी खामियों को स्वीकार करे और डिजिटल अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए। जनता को ‘सुरक्षा का अहसास’ चाहिए, न कि केवल भारी भरकम पुलिसिया तामझाम।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Follow on Google News
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Threads Copy Link

Related Posts

पेड़ों की कटाई में शामिल अफसरों पर गिरेगी गाज, 6 साल की देरी पर भड़का झारखंड हाईकोर्ट

April 20, 2026

ISIS समर्थक राहुल सेन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका हुई खारिज

April 20, 2026

झारखंड में गर्मी का ‘महा-संग्राम’ : लू के थपेड़ों से झुलस रहा जनजीवन

April 20, 2026

RECENT ADDA.

पेड़ों की कटाई में शामिल अफसरों पर गिरेगी गाज, 6 साल की देरी पर भड़का झारखंड हाईकोर्ट

April 20, 2026

ISIS समर्थक राहुल सेन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका हुई खारिज

April 20, 2026

झारखंड में गर्मी का ‘महा-संग्राम’ : लू के थपेड़ों से झुलस रहा जनजीवन

April 20, 2026

झारखंड भाजपा का नया ‘ड्यूटी रोस्टर’ जारी, जानें किसकी कब है बारी

April 20, 2026

मेडिकल छात्रा दुष्कर्म मामले में राजनीतिक उबाल, इंसाफ के लिए सड़क पर उतरी भाजपा

April 20, 2026
Today’s Horoscope
© 2026 Public Adda. Designed by Launching Press.
  • About
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Adsense

Home

News

Web Stories Fill Streamline Icon: https://streamlinehq.com

Web Stories

WhatsApp

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.