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रांची: झारखंड में वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब राज्य के कई जिलों में कुल्हाड़ियाँ बेखौफ चल रही थीं। जामताड़ा, पलामू, चाईबासा और रांची के जंगलों से सैकड़ों कीमती पेड़ों को काटकर 200 से अधिक ट्रकों में भरकर ठिकाने लगा दिया गया। इस भीषण वन कटाई मामले पर झारखंड उच्च न्यायालय ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है।
सोमवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने जांच की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत के सख्त आदेश पर एडीजी सीआईडी और जांच अधिकारी डीएसपी सीआईडी को व्यक्तिगत रूप से (सशरीर) कोर्ट में हाजिर होना पड़ा।
जांच में बड़ा खुलासा : वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि इस बड़े घोटाले में वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। रेंजर, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और वन गार्ड जैसे पदों पर बैठे लोग ही इस अवैध कटाई में शामिल पाए गए हैं। इसी मिलीभगत के कारण जांच प्रक्रिया में बाधा आई और मामला वर्षों तक लटका रहा।
सरकार ने अदालत को बताया कि:
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अब तक दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया जा चुका है।
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एक अन्य फरार अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
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पलामू में दर्ज दो प्रमुख एफआईआर (FIR) की जांच वर्तमान में सीआईडी कर रही है।
6 साल की देरी और कोर्ट की फटकार
हाईकोर्ट ने जांच में हो रही छह वर्षों की देरी को ‘गंभीर’ करार देते हुए इसे अवमानना की श्रेणी में रखने की चेतावनी दी है। अदालत ने स्पष्ट लहजे में कहा कि केवल फाइलों और दस्तावेजों का बहाना बनाना अब नहीं चलेगा। सीआईडी को सक्रिय होकर त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
पिछली सुनवाई में पीसीसीएफ और डीजीपी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अदालत ने ‘असंतोषजनक’ करार दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि जब मामला इतना संगीन था, तो सीआईडी ने प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए? दस्तावेजों के अभाव का हवाला देने पर भी अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई और सीआईडी को सभी जरूरी साक्ष्यों के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया।
क्या था पूरा मामला?
2020 के लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए लकड़ी तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर राज्य की वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचाया। ट्रकों के जरिए लकड़ी की तस्करी की गई, जिसकी जांच बाद में सीआईडी को सौंपी गई थी। अब अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है।

