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Health News: कई बार लोग सोचते हैं कि ज्यादा सोना मतलब शरीर को आराम मिल रहा है, लेकिन असलियत हमेशा इतनी सरल नहीं होती। ब्रिटेन के मेडिकल विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि अगर आप रोज 9–10 घंटे से ज्यादा सो रहे हैं और फिर भी उठते समय थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का इशारा हो सकता है। सर्दी-जुकाम, फ्लू या वायरल संक्रमण के दौरान शरीर खुद को लड़ाई के लिए तैयार करता है। इम्यून सिस्टम ऐसे रसायन बनाता है जो नींद बढ़ाते हैं, इसलिए लंबी नींद के बाद भी कमजोरी बनी रहती है।
शराब, दवाइयां और बिगड़ी लाइफस्टाइल भी दोषी
अगर आप रात में देर तक फोन चलाते हैं, नाइट शिफ्ट करते हैं या तनाव में रहते हैं, तो आपकी नींद का संतुलन बिगड़ जाता है। शरीर लगातार ‘स्लीप डेट’ में चला जाता है और जैसे ही मौका मिलता है, आपको ज्यादा सोने पर मजबूर कर देता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शराब और नशे वाले पदार्थ दिमाग के उन कैमिकल्स को सुस्त कर देते हैं, जो जागने में मदद करते हैं। इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और दिनभर सुस्ती बनी रहती है। कई दवाइयां जैसे एंटीहिस्टामिन, एंटीडिप्रेसेंट, पेनकिलर और मसल रिलैक्सेंट भी ज्यादा नींद लाती हैं। अगर नई दवा शुरू करने के बाद यह समस्या बढ़ जाए, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
कहीं यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?
हाइपोथायराइड, डायबिटीज, फाइब्रोमायल्जिया, क्रॉनिक पेन, क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम और कई अन्य रोग शरीर की ऊर्जा को बहुत प्रभावित करते हैं। ऐसे में शरीर हर समय आराम चाहता है और नींद बढ़ जाती है। मानसिक स्वास्थ्य भी नींद का बड़ा कारक है। डिप्रेशन और एंग्जायटी वाले लोग अक्सर सामान्य से ज्यादा सोते हैं, लेकिन फिर भी तरोताज़ा महसूस नहीं करते। इसे हाइपरसोम्निया कहा जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर नींद बढ़ रही है, ऊर्जा कम हो रही है और दिमाग भारी-भारी लग रहा है, तो इसे हल्के में न लें। यह ओवरस्लीपिंग नहीं, शरीर की एक गंभीर चेतावनी भी हो सकती है।

