New Delhi: भारतीय सैन्य इतिहास में कई ऐसी गौरवशाली कहानियां दर्ज हैं, जिन्हें सुनकर आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। ऐसी ही एक कहानी है साल 1986 की, जब भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’ (Operation Brasstacks) के जरिए पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिला दी थी। यह केवल एक युद्धाभ्यास नहीं था, बल्कि एक ऐसा मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological War) था जिससे इस्लामाबाद की फौज थर-थर कांपने लगी थी।
क्यों शुरू हुआ था यह ऑपरेशन?
1971 की करारी हार के बाद पाकिस्तान बदले की आग में जल रहा था और कश्मीर में विद्रोह भड़काने की साजिशें रच रहा था। जवाब देने के लिए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल के. सुंदरजी (General K. Sundarji) के नेतृत्व में एक विशाल सैन्य अभ्यास की योजना बनाई गई। इसका नाम ‘ब्रासस्टैक्स’ रखा गया, जो ब्रिटिश सैन्य शब्दावली से प्रेरित था।
आंकड़े जो दुनिया को हैरान कर गए
जनवरी 1986 में राजस्थान के रेगिस्तान में जब यह ड्रिल शुरू हुई, तो यह उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा बन गया। इसमें शामिल ताकत कुछ इस प्रकार थी:
-
सैनिक: करीब 4 लाख वीर जवान।
-
टैंक: 4,000 अत्याधुनिक टैंकों की गड़गड़ाहट।
-
वायुसेना: 300 फाइटर एयरक्राफ्ट (मिग-21 और सुखोई-7)।
-
मिसाइल: ब्रह्मोस जैसी प्रोटोटाइप मिसाइलों का परीक्षण।
पाकिस्तान में मच गई थी अफरा-तफरी
यह युद्धाभ्यास इतना विशाल था कि अमेरिकी सैटेलाइट्स ने भी इसे कैप्चर किया और पाकिस्तान को लगा कि भारत किसी भी वक्त हमला कर सकता है। भारतीय वायुसेना ने ‘फोक ट्रॉट’ ऑपरेशन के तहत एलओसी के पास लो-लेवल फ्लाइंग की, जबकि नौसेना ने अरब सागर में अपनी मोर्चाबंदी तेज कर दी। पाकिस्तान की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उसने अपनी पूरी सेना को बॉर्डर पर तैनात कर दिया और परमाणु युद्ध तक की धमकियां देने लगा था।
इस खबर को भी पढ़ें : ऑपरेशन सिंदूर जारी, भारत ने किया पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना न केवल संख्या में बड़ी है, बल्कि उसकी तकनीक और रणनीतिक समझ दुनिया के किसी भी देश को पछाड़ने में सक्षम है। आज भी रणनीतिकार इसे भारतीय सेना का अब तक का सबसे सफल ‘मास्टरस्ट्रोक’ मानते हैं।



