New Delhi: पीएम नरेंद्र मोदी इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को भारतीय संस्कृति और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का एक विशेष अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को उन्होंने ‘एक्स’ (X) पर एक प्रेरक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कर्मशील और ऊर्जावान नागरिकों को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति करार दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देशवासियों के परिश्रम से ही विकास की नई राहें प्रशस्त होती हैं।
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देश के एक सजग नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करें। इस तरह हम न केवल भारतवर्ष के नवनिर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं, बल्कि एक समर्थ और समृद्ध राष्ट्र की नींव को और मजबूत कर सकते हैं।
राज्ञो… pic.twitter.com/IXCeeJLaBJ
— Narendra Modi (@narendramodi) April 29, 2026
परिश्रम से मिलेगी सफलता— पीएम मोदी ने जो सुभाषित साझा किया, वह निरंतर प्रयास और उत्साह के महत्व को दर्शाता है: ‘अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः। करोति सफलं जन्तोः कर्म यच्च करोति सः॥’ इसका भावार्थ है कि बिना उत्साह खोए निरंतर कार्य में लगे रहना ही सफलता की कुंजी है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि नागरिकों के इन्हीं प्रयासों से देश आत्मनिर्भरता और उन्नति के शिखर तक पहुंचेगा।
कर्तव्यों की याद दिलाते सुभाषित— गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री लगातार विभिन्न विषयों पर सुभाषित पोस्ट कर रहे हैं। 29 अप्रैल को उन्होंने सजग नागरिकों को लोकतंत्र मजबूत करने और रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करने की प्रेरणा दी थी। वहीं, 28 अप्रैल को उन्होंने संयम और समर्पण के साथ किए गए परिश्रम को सफलता का मूल आधार बताया था। 27 अप्रैल को उन्होंने ‘परोपकार’ पर जोर देते हुए नागरिकों की निःस्वार्थ सेवा भावना को राष्ट्र की असली शक्ति बताया था। प्रधानमंत्री का यह अंदाज़ न केवल लोगों को प्रेरित कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृत के अनमोल ज्ञान से भी जोड़ रहा है।
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