Ranchi : अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, रांची इकाई ने जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) के आदेश के खिलाफ आंदोलन को तेज कर दिया है। संघ ने घोषणा की है कि 8 सितंबर को जिले के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के शिक्षक काला बिल्ला लगाकर शिक्षण कार्य करेंगे। संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने बताया कि पूरे राज्य में जुलाई माह से शिक्षकों को वार्षिक वेतन वृद्धि दी जा रही है। लेकिन रांची जिले में DSE बादल राज ने वेतन वृद्धि देने से पहले शिक्षकों से शपथ पत्र जमा करने की मांग की है। यह आदेश न केवल तानाशाही है बल्कि शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला भी है। उन्होंने कहा कि 30 वर्षों के शिक्षण इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब ऐसी शर्त लगाई गई है।
चरणबद्ध आंदोलन
संघ ने इस आंदोलन को तीन चरणों में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
- पहले चरण में शिक्षक दिवस के दिन आदेश की प्रति जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
- दूसरे चरण में 8 सितंबर को शिक्षक काला बिल्ला लगाकर कक्षाएं लेंगे।
- तीसरे और अंतिम चरण में 20 सितंबर को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
शिक्षकों से अपील
संघ ने रांची, ओरमांझी, कांके, इटकी, नगड़ी, नामकुम, अनगड़ा, बुंडू, तमाड़, सिल्ली और बेड़ों सहित जिले के सभी प्रखंडों के शिक्षकों से आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। नसीम अहमद ने कहा कि हर शिक्षक और शिक्षिका को काले रिबन के साथ विद्यालय पहुँचना चाहिए ताकि समाज के लोग भी इस आंदोलन को देख सकें और अन्य शिक्षक प्रेरित हों।
आंदोलन की गाइडलाइन
संघ ने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि –
- काला रिबन पहले ही खरीद लें और विद्यालय जाते समय घर से पहनकर निकलें।
- विद्यालय में रिबन लगाकर ही शिक्षण कार्य करें और सहकर्मियों को भी ऐसा करने को प्रेरित करें।
- आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बनाकर जिला व राज्य स्तरीय ग्रुपों में भेजें ताकि DSE को उसी की भाषा में जवाब दिया जा सके।
- विद्यालय की छुट्टी के बाद अपने टैग/CRC/BRC पर जमा होकर नारेबाजी व प्रदर्शन करें और मीडिया को तस्वीरें भेजें।
- किसी भी हाल में भयभीत न हों। शिक्षक आंदोलन हमेशा परिवर्तन और समाज कल्याण के लिए होता है।
शिक्षक समाज की एकजुटता
संघ का मानना है कि यदि एक-एक शिक्षक इस आंदोलन में शामिल होता है तो प्रशासन को झुकने पर मजबूर होना पड़ेगा। शिक्षकों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संघर्ष परंपरा है
नसीम अहमद ने कहा – “संघर्ष हमारी परंपरा है। हमने पहले भी अफसरशाही को झुकाया है और अब भी झुकाएंगे। यदि जरूरत पड़ी तो इतिहास को दोहराया जाएगा।”
इस आंदोलन में अनूप केशरी, सलीम सहाय, राकेश कुमार, संतोष कुमार, सतीश बड़ाइक, रंजीत मोहन, अफसरुद्दीन, सुमंत लाल, शिवनाथ टोप्पो, भीम सिंह मुंडा, गोवर्धन महतो, शमीम अहमद, मुश्ताक आलम, कल्लू तिर्की, अभा कुमारी, रेणु कुमारी, संगीता टोप्पो, सोनिया, आभा कुजूर, पूनम, सुषमा इक्का, प्रिया कुमारी और नीता मिंज समेत बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हैं।
संघ ने अंत में चेतावनी दी कि यदि रांची जिले के शिक्षकों को तुरंत वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं दी गई और शपथ पत्र की शर्त वापस नहीं ली गई, तो 20 सितंबर को होने वाला धरना प्रदर्शन निर्णायक साबित होगा।



